मुंशी प्रेमचंद्र की ये रचनाये हैं प्रसिद्ध, इस फिल्म की लिखी थी कहानी
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मुंशी प्रेमचंद्र जयंती : मुंशी प्रेमचंद्र की ये रचनाये हैं प्रसिद्ध, इस फिल्म की लिखी थी कहानी

मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी में लमही गाँव में हुआ था। उनका दूसरा नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। उनकी शि

मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी में लमही गाँव में हुआ था। उनका दूसरा नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। उनकी शिक्षा का आरंभ उर्दू, फ़ारसी पढ़ने से हुआ। 1898 में मैट्रिक की परीक्षा के पास करने के बाद वह एक स्थानिक पाठशाला में अध्यापक नियुक्त हो गए। 1910 में वह इंटर और 1919 में बी.ए. के पास करने के बाद स्कूलों के डिप्टी सब-इंस्पेक्टर नियुक्त हुए। ऐसे महान हिन्दी और उर्दू के सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यासकार, कहानीकार एवं विचारक मुंशी प्रेमचंद की आज जयंती है। आज 140 वी जयंती मनाई जा रही है।

 

प्रेमचंद्र की प्रसिद्ध हिंदी रचनायें

उपन्यास: सेवासदन, प्रेमाश्रम, निर्मला, रंगभूमि, गबन, गोदान ; कहानी संग्रह: नमक का दरोग़ा, प्रेम पचीसी, सोज़े वतन, प्रेम तीर्थ, पाँच फूल, सप्त सुमन ; बालसाहित्य: कुत्ते की कहानी, जंगल की कहानियाँ आदि।  मुंशी प्रेमचंद ने डेढ़ दर्जन उपन्यास और 300 से अधिक कहानियां लिखीं।

 

सीबीएसई के पाठ्यक्रम में महत्ता –

सीबीएसई के स्कूलों प्रेमचंद्र की में पांच रचनाएं पढ़ाई जाती हैं। सीबीएसई की कक्षा 9 में पढ़ाई जाने वाली क्षितिज भाग 1 में दो बैलों की कथा, कक्षा 10 की स्पर्श भाग 2 में बड़े भाई साहब, 11वीं की अंतरा भाग 1 में ईदगाह और आरोह भाग 1 में नमक का दारोगा को रखा गया है। कक्षा 12 में चलने वाली अंतरा भाग 2 में रंगभूमि उपन्यास का अंश सूरदास की झोपड़ी को पढ़ाया जा रहा है।

यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में महत्ता –

सीबीएसई का पाठ्यक्रम देख कर ज्ञात होता है कि सम्राट प्रेमचंद की रचनाएं हिन्दी स्कूलों से अधिक अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ाई जा रही हैं। यूपी बोर्ड ने जहां कक्षा 9 व 11 में प्रेमचंद की एक-एक कहानियों को शामिल किया है, यूपी बोर्ड के स्कूलों में कक्षा 9 में पढ़ाई जाने वाली पुस्तक में प्रेमचंद का मंत्र और कक्षा 11 में बलिदान को पढ़ाया जा रहा है। 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों के कोर्स में प्रेमचंद की एक भी रचना सम्मलित नहीं है।

इस फिल्म की कहानी को लिखा –

मुंशी प्रेमचंद्र ने साल 1934 में रिलीज हुई फिल्म मिल (मजदूर) की कहानी को लिखा था और इस फिल्म के डायरेक्ट मोहन भवनानी थे। इस फिल्म को ब्लैक एंड व्हाइट फिल्म को मुंबई की अंजता सिनेटोन ने प्रोड्यूस किया था। प्रेमचंद्र ने इस फिल्म में छोटी सी भूमिका निभाई थी।