मलमास में भूल कर भी न करें ये कार्य, नहीं तो हो जाएगा अनर्थ
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मलमास में भूल कर भी न करें ये कार्य, नहीं तो हो जाएगा बड़ा अनर्थ

मलमास आरंभ होने जा रहे हैं। मलमास में किसी भी शुभ और नए कार्य को नहीं किया जाता है। पंचांग के अनुसार मलमास प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार आता है।

नई दिल्ली- मलमास आरंभ होने जा रहे हैं। मलमास में किसी भी शुभ और नए कार्य को नहीं किया जाता है। पंचांग के अनुसार मलमास प्रत्येक तीन वर्ष में एक बार आता है। मलमास को अधिक मास और पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। मलमास में शादी विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि जैसे शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। शुभ कार्यों को मलमास मे निषेध माना गया है। इस बार मलमास 18 सितंबर से शुरू होकर 16 अक्टूबर तक रहेगा।

मलमास को क्यों कहा गया “पुरुषोत्तम मास”

मलमास को पहले बहुत ही अशुभ माना जाता था लेकिन उसके बाद श्रीहरि ने इस मास को अपना नाम दे दिया जिसके बाद से इसे शुभ माना जाने लगा। अब इस मास को नाम “पुरुषोत्तम मास” दिया गया है। मलमास में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। इस समय चतुर्मास चल रहा है। चातुर्मास में भगवान विष्णु विश्राम करने के लिए पाताल लोक में चले जाते हैं। अधिक मास में भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मान्यता है कि अधिक मास में किए गए दान आदि का कई गुणा पुण्य प्राप्त होता है।

तीन वर्ष में एक बार क्यों आता है

पंचांग के अनुसार मलमास या अधिक मास का आधार सूर्य और चंद्रमा की चाल से है। सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है। चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। इन दोनों वर्षों के बीच 11 दिनों का अंतर होता है। यही अंतर तीन साल में एक महीने के बराबर होता है। इसी अंतर को दूर करने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास आता है। इसी को मलमास कहा जाता है।

इस मास नहीं करने चाहिए ये कार्य

मलमास में शादी विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि जैसे शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। शुभ कार्यों को मलमास मे निषेध माना गया है। इस महीने में नया व्यवसाय या नया कार्य आरम्भ नही करना चाहिए। वहीं इस मास में नए मकान का निर्माण और संपत्ति का क्रय नहीं करना चाहिए।

ये कार्य करने में नहीं है मनाही

खरमास में विवाह से जुड़ी चर्चा, विवाह की सहमति, पहले से आरंभ किए गए कार्यों का समापन, सरकारी कार्य, शिक्षण संस्थान में एडमिशन, प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री, वाहन की बुकिंग, ब्याना, पढ़ाई, सामान्य दिनचर्या या दैनिक व्यवस्था के कार्य आदि किए जा सकते हैं।

मलमास में पड़ने वाली शुभ तिथियां

मलमास में कुछ तिथियां बेहद शुभ हैं जिनमें आप खरीदारी कर सकते हैं। 18 सितंबर, शुक्रवार को उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र है, यह बेहद मंगलकारी माना जाता है। 21, 26 सितंबर और अक्टूबर में 1, 2, 4, 6, 7, 9, 11 को सर्वार्थसिद्धि योग है।

मान्यता है कि इस योग में कोई भी काम शुरू करने पर सफलता जरूर मिलती है। 19 व 27 सितंबर को द्विपुष्कर योग है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस योग में कोई भी कार्य करने पर दोगुना फल मिलता है। 2 अक्टूबर को अमृतसिद्धि योग है।