बोलीं संजीत की मां, 'ऐसी ही पुलिस के साथ होता है बिकरू कांड'
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बिलखते हुए बोलीं संजीत की मां, ‘ऐसी ही पुलिस के साथ होता है बिकरू कांड’

रक्षाबंधन के दिन संजीत की मां को ढांढस बंधाने पहुंचीं पड़ोसी महिलाओं को देख कुसुमा देवी फफक पड़ीं।

कानपुर- रक्षाबंधन के दिन संजीत की मां को ढांढस बंधाने पहुंचीं पड़ोसी महिलाओं को देख कुसुमा देवी फफक पड़ीं। उन्होंने महिलाओं से कहा कि इतनी मुश्किलों से इकलौते लड़के को पाल-पोस कर बड़ा किया था, जब सहारा देने के काबिल हुआ तो हत्यारों ने मेरे लाल को छीन लिया। पुलिस की बात आते ही उनका गुस्सा फूट पड़ा। रोते हुए बोलीं, ऐसे पुलिसकर्मियों के साथ ही बिकरू जैसा कांड होता है।

संजीत को देखे मां कुसुमा देवी को करीब डेढ़ महीना हो चुका है। रविवार को वह जान देने के लिए पांडु नदी की ओर चल पड़ीं। पुलिस ने उन्हें किसी तरह शांत कराया। आसपास की महिलाओं ने उन्हें हिम्मत बंधाई। इस पर वह फूटकर रो पड़ीं और हत्यारों के साथ पुलिसकर्मियों को कोसती रहीं। रो-रोकर बहन रुचि का भी हाल बेहाल है। परिवार को अभी संजीत के जीवित होने की आस है।

मामला पहुंचा सीबीआई के पास

संजीत अपहरण और हत्याकांड मामले की जांच के लिए योगी सरकार ने मंजूरी दे दी है। यूपी सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर सीबीआई से केस की जांच कराने की सिफारिश की है। इधर संजीत की मां-पिता और बहन बर्रा के शास्त्री चौक पर धरना दे रहे हैं। परिवार की मांग है कि संजीत की लाश ढूंढी जाए।

संजीत हत्याकांड का पुलिस ने 24 जुलाई को खुलासा किया था। खुलासे के नौ दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस संजीत के शव समेत हत्या से जुड़े किसी भी साक्ष्य को बरामद नहीं कर सकी है। खुलासे के वक्त पुलिस ने जो बात बताई थी उस पर फिर से सवाल उठने लगे हैं।

संजीत के परिवार ने पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस ने जल्दबाजी में खुलासा किया और फर्जी खुलासों में साक्ष्य नहीं मिलते हैं। यदि संजीत के शव को पांडू नदी में फेंका गया तो उसकी हड्डियां तो मिलनी चाहिए। ज्ञात हो कि शुरू से ही इस मामले में पुलिस का रवैया संदेहास्पद रहा है। पुलिस की लापरवाही के कारण इतना बड़ा मामला हो गया।