आदिलक्ष्मी

आज के दौर में जो काम एक पुरुष कर सकते है उसे महिला भी कर सकती है. लेकिन भारत में बचपन से सिखाया जाता है कि जो काम पुरुष करते है उसे सिर्फ पुरुष ही कर सकते है. यहां तक आज भी भारत के कई ग्रामीण इलाकों में लड़कियां शुरूआती शिक्षा के लिए भी मोहताज है.

आज हम लेकर आये हैं एक ऐसी महिला की कहानी जिसने लोगों की परवाह न करते हुए अपने पति के साथ पंचर बनाने का काम शुरू किया और देशभर की महिलाओं के लिए मिशाल बन गयी है. जो इस तरह का मेहनत भरा काम करके अपने घर को चला रही है.

3 साल पहले आदिलक्ष्मी ने खोली थी पंचर बनाने की दुकान

आदिलक्ष्मी

तेलंगाना के थागुडेम जिले में रहने वाली आदिलक्ष्मी नाम की इस महिला की शादी  साल 2010 में वीरभद्रम नाम के शख्स से हो थी, जिसके बाद उनके दो बेटियां हुयी थी. उसके बाद से उनके पति का अकेले घर खर्च चलाना मुश्किल हो गया था. उन्होंने अपनी पति की सहायता करने की सोचा और उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर 3 साल पहले एक पंचर बनाने की दुकान खोली और इस दुकान में ही रहकर अपने पति का हाथ बंटाने लगी.

शुरूआती समय में उनके स्त्री कारीगर होने की वजह से ट्रक चालक उनकी दुकान में जाने से कतराते थे. लेकिन धीरे-धीरे करके उनके दुकान पर लोगों ने जाना शुरू किया और आज के समय में पुरे तेलंगाना में आदिलक्ष्मी टायर पंचर बनाने का सबसे अच्छा काम करती हैं. हालांकि उन्होंने अपनी शुरूआती पढाई के समय ही शिक्षा का साथ छोड़ दिया था.

दुकान खोलने के लिए घर को रख दिया था गिरवी

आदिलक्ष्मी

आपको बता दें उन्होंने जब अपनी पंचर बनाने की दुकान खोलने की सोची थी, उस समय उनके पास इतने पैसे भी ना थे कि वह अपनी दूकान खोल सके. इसके लिए दोनों पति-पत्नी अपने घर को गिरवी रखने का फैसला किया और घर गिरवी रखने से जो पैसे उन्हें मिले उससे उन्होंने दुकान खोल ली. शुरूआती समय में उन्हें अपनी दुकान चलाने के लिए बेहद संघर करना पड़ा था और आब उनकी दूकान 24 घंटे खुली रहती है. आज जो भी इस महिला के बारे में सुन रहा है, वह इन्हें सलाम कर रहा है.

सरकार से मदद की है आस

आदिलक्ष्मी

जब आदिलक्ष्मी से उनके काम काके बारे मने पूछताछ की गयी तो उन्होंने बताया कि. ‘ उनके पास औजार बेहद कम है पर जितने भी उनसे उनका काम चल जाता है. अगर सरकार से कोई मदद मिल जाए मेरी दोनों बेटियों का भविष्य सुधर जाएगा’.

आपको बता दें आदिलक्ष्मी टायर फिक्स करने के वेल्डर और मेटल फ्रेम फैब्रिकेटर भी है, वह उस काम को बेहद शानदार तरीके से करती है. उन्होंने बताया कि कोथागुडेम एक ऐसी जगह है, जहाँ खनन का कम बड़े पैमाने पर होता है,  ऐसे में यहाँ भारी-भारी ट्रक को और वाहनों का अवागमन होता रहता है. आदिलक्ष्मी पुरे देश की महिलाओं के लिए एक मिशाल बन चुकी है, जिसने अपने पति की सहायता करने केलिए भरी भरकम औजार उठा लिए.