...तो क्या रघुवंश प्रसाद सिंह JDU में होंगे शामिल?
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…तो क्या रघुवंश प्रसाद सिंह JDU में होंगे शामिल? आरजेडी से नाराजगी की ये है बड़ी वजह!

बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नेताओं का दल बदलने दौर जारी हैं। कुछ दिनों पहले ही पूर्व सीएम जीतन राम मांझी महागठबंधन से अलग हो गए। बता दें कि- साल 2015 बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा ने 1 सीट जीती थीं। जीतन राम मांझी आरजेडी हाईकमान से विधानसभा सीटों को लेकर तनी हुई थी।

अब राष्ट्रीय जनता जनता पार्टी के उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिह इन दिनों पार्टी हाईकमान से नाराज चल रहे हैं। इससे पहले इसी साल जून के महीने में उन्होंने पार्टी के उपाध्यक्ष पद से इंस्तीफा तक दें दिया था। उनका नाराज होने का कारण लोजपा पूर्व सांसद रामा सिंह को आरजेडी पार्टी में शामिल करना बताया जा रहा है। साल 2014 के आम चुनाव में रामा सिंह ने रघुवंश प्रसाद को पराजित करा दिया था।

रघुवंश प्रसाद पार्टी उपाध्यक्ष पद से इस्तीफी दें चुकें हैं

इसके अलावा नेता रघुवंश प्रसाद साल 2014 में चुनाव हराने के बाद हाशिए पर चले गए थे। इसके बाद ये कयास लगाए जा रहे थे कि इस साल उन्हें आरजेडी पार्टी की ओर से संसद के उच्च राज्यसभा भेजा जाना तय माना जा रहा था। लेकिन पार्टी ने अमरेंद्र धारी सिंह और प्रेमचंद गुप्ता को राज्यसभा भेजने का फैसल किया। नेता रघुवंश प्रसाद पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रासद यादव के बेहद करीबी बताए जाते हैं। इसके बावजूद भी वो पार्टी के भीतर अपने राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।

काफी दिनों से लालू प्रसाद यादव चारा घोटला में जेल की सलाखों के पीछे सजा काट रहे हैं। ऐसे में उनकी पार्टी में एक के बाद एक नेताओं का बगावत का दौर शुरू हो गया हैं। बिहार में 243 विधानसभा की सीटों हैं। अगले महीने सितंबर में तीन चरणाों में चुनावों की डेट का ऐलान होना है। तो ऐसे में अभी तक आरजेडी पार्टी में नेताओं के बीच तालमेल नहीं बन पा रहा हैं। आरजेडी पार्टी के नेताओं के छिटकने से सीधे तौर एनडीए गठबंधन को फायदा हो सकता हैं।

लालू प्रसाद यादव के दखल के बाद रघुवंश मान जाएंगे!

आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद के नाराज होने की कई वजह बातई जा रही है जैसे -आरजेडी प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह की कामकाज से पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हैं। ये भी बात सामने आ रही है कि- दिल्ली के एम्स में भर्ती रघुवंश प्रसाद सिंह को खुसामंद करने के लिए तेजस्वी नेता ने उनसे मुलाकात की। इस दौरान तेजस्वी ने उनसे इस्तीफा वापस लेने का रिकवेस्ट की,लेकिन वो नहीं माने। उनके अड़ियल रवैये को देखते हुए ये कयास लागए जा रहे हैं कि वो लालू प्रसाद के मनाने पर मान जाएंगे।