रूस ने खत्म किया ह्यूमन ट्रायल, सितंबर से मिलेगी कोरोना वैक्सीन
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खुशखबरी: रूस ने बना ली कोरोना वैक्सीन, सितम्बर से बाजार में होगी उपलब्ध

दुनियाभर में जहां कोरोना वायरस के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है।

मास्को- दुनियाभर में जहां कोरोना वायरस के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। इसी बीच रुस से अच्छी खबर सामने आ रही है। लंबे समय से जिस कोरोना वैक्सीन (टीका) का पूरी दुनिया के लोग इंतजार कर रहे थे अब उसका इंतजार खत्म हो गया है। दरअसल, रूस 12 अगस्त को कोरोना वायरस वैक्सीन रजिस्टर करवाने जा रहा है। उप-स्वास्थ्य मंत्री ओलेग ग्रिडनेव ने शुक्रवार को कहा कि रूस 12 अगस्त को कोरोना वायरस के खिलाफ अपना पहला टीका रजिस्टर कराएंगे। बता दें कि गामालेया रिसर्च इंस्टीट्यूट और रूसी रक्षा मंत्रालय द्वारा संयुक्त रूप से टीका विकसित किया गया है।

10 अगस्त तक आ जायेगी बाजार में

देश के स्वास्थ्य मंत्री मिखाइल मुराश्को ने कहा है कि कोरोना वायरस के लिए बनाई जा रही वैक्सीन का ट्रायल पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि ट्रायल पूरा होने के बाद अब यह वैज्ञानिकों के ऊपर है कि वे वैक्सीन को बाजार में कब लाते हैं। बता दें कि गामालेया इंस्टीट्यूट द्वारा बनाई गई इस वैक्सीन के 10 अगस्त तक बाजार में आने का दावा किया जा रहा था। इसके अलावा अब सितंबर से इसके प्रॉडक्शन की बात कही जा रही है।

किसी के भी अंदर नकारात्‍मक साइड इफेक्ट नहीं

टीका की प्रभावशीलता का आकलन तब किया जाएगा जब जनसंख्या प्रतिरक्षा का गठन किया गया हो। बता दें कि वैक्सीन के वैज्ञानिक ​​परीक्षणों की शुरुआत 18 जून को हुई और इसमें 38 वॉलंटियर शामिल थे। सभी प्रतिभागियों ने इम्युनिटी विकसित की। पहले समूह को 15 जुलाई को और दूसरे समूह को 20 जुलाई को छुट्टी दे दी गई।

रूस के रक्षा मंत्रालय ने आगे कहा कि किसी भी वॉलटिंअर के अंदर कोई भी नकारात्‍मक साइड इफेक्‍ट या फिर किसी भी तरह की कोई परेशानी नहीं आई। बता दें कि रूस ने पहले ही दावा किया था कि वह कोरोना वायरस के खिलाफ जारी वैश्विक लड़ाई में कोरोना वायरस वैक्‍सीन विकसित करने में वह दूसरों से कई महीने आगे चल रहा है।

ट्रायल पर उठ रहे सवाल

रूसी वैक्सीन पर दुनिया भर में सवाल भी उठ रहे हैं। रूस की इस वैक्सीन को लेकर दुनिया के तमाम वैज्ञानिक आशंकित हैं क्योंकि उसने अभी तक वैक्सीन के ट्रायल का कोई डेटा जारी नहीं किया है। ऐसे में यह पता करना ही मुश्किल है कि आखिर यह कितनी असरदार है। वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि वैक्सीन जल्दी बाजार में लाने के लिए राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है, तो कुछ इसके अधूरे ह्यूमन ट्रायल को भी सवालों के घेरे में रख रहे हैं।