जानिए क्या होती है डूब सिगरेट, जो डुबो सकती है नामी अभिनेत्रियों का करियर, हो सकती है इतने वर्ष की सजा

मुम्बई- दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में ड्रग्स एंगल ने फिल्म जगत में हड़कम्प मचा दिया है। नॉरकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो अब तक कई बड़े सितारों को पूछताछ के लिए बुला चुका है। वहीं ड्रग्स चैट्स वायरल होने के बाद दीपिका को भी शनिवार को पूछताछ के लिए बुलाया गया। उनसे करीब साढ़े पांच घंटे पूछताछ की गई, जिसमें उन्होंने कई बातों का जवाब दिया।

एनसीबी अधिकारियों द्वारा की गई पूछताछ में उन्‍होंने ड्रग्स लेने की बात से तो साफ मना कर दिया, लेकिन सूत्रों के अनुसार कहा जा रहा है कि दीपिका पादुकोण ने खास तरह की सिगरेट पीने की बात स्वीकार की है, जिसे आम बोलचाल भाषा में ‘डूब’ कहते हैं। आइए हम आपको बताते हैं कि आखिर ये डूब सिगरेट होती क्‍या होती है? क्‍या इसमें किसी तरह की ड्रग्‍स का इस्‍तेमाल होता है और एनडीपीएस कानून इसके बारे में क्‍या कहता है?

ये होती है डूब सिगरेट

जानिए क्या होती है डूब सिगरेट, जो डुबो सकती है नामी अभिनेत्रियों का करियर, हो सकती है इतने वर्ष की सजा

डूब एक प्रकार की हैंड रोल्ड सिगरेट होती है। इसमें आपको खुद पेपर रोल करके तैयार करना होता है और उसमें मनचाही चीज भरकर उसका इस्तेमाल करना। रोल सिगरेट का ज्यादातर यूज नशा करने के लिए ही किया जाता है। इसमें नशे का कोई भी पदार्थ भरा जा सकता है। एनसीबी से पूछताछ के दौरान, रकुल ने भी रिया चक्रवर्ती से अपनी ड्रग्स को लेकर बातचीत के बारे में कहा कि उस चैट में जिस ‘डूब’ का जिक्र था वो रोल्ड सिगरेट होती है, कोई नारकोटिक पदार्थ या ड्रग्स नहीं होती।

प्रतिबंधित ड्रग्स का सेवन करने से हो सकती है इतनी सजा

कानून के जानकारों के अनुसार एनडीपीएस एक्ट के तहत कोई व्यक्ति नियमों के खिलाफ जाकर किसी ड्रग्स को बनाता है, रखता है, अंतरराज्यीय इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट करता है, या खरीदता है तो प्रतिबंधित ड्रग की कम मात्रा होने पर अपराधी को 6 महीने और दस हजार तक जुर्माना हो सकता है। वहीं कमर्शियल क्वांटिटी से कम लेकिन स्‍मॉल क्वांटिटी से अधिक होने पर 10 साल तक और एक लाख तक जुर्माना और कमर्शियल क्वांटिटी होने पर कम से कम 10 साल पर अधिकतम 20 साल सजा और दो लाख तक जुर्माना हो सकता है।

एनडीपीएस एक्ट के तहत नारकोटिक ड्रग का सेवन करने वालों को भी एक साल तक की सजा का प्रावधान है और जो लोग ऐसी क्रियाकलापों को वित्‍तीय रूप से बढ़ावा देते है तो ऐसे लोगों को कम से कम 10 साल और अधिकतम 20 साल सजा और दो लाख तक जुर्माना हो सकता है।

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