इन बॉलीवुड फिल्मों में पार हुई है अश्लीलता की हद,अकेले देखें
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इन 5 फिल्मों में पार हुईं अश्लीलता की सारी हदें, परिवार से छुपकर ही देखें

मुंबई : आज़ादी के बाद का जो दौर था उस समय सिनेमा में अधिकतर पौराणिक गाथाओं को दर्शाया जाता था. लेकिन बदलते समय के अनुसार फिल्मों का दौर भी धीरे-धीरे बदलता रहा हैं. ब्लैक-एन-वाइट सिनेमा के दौर के बाद रंगीन फिल्मों का जमाना आया, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया और तभी से ही रंगीन फिल्मों का दौर शुरू हो गया. उस वक़्त फिल्मों में प्यार और मोहब्बत व प्रेम प्रसंगों दिखाना तो दूर की बात है किसी ने ऐसी फ़िल्में देख भी इंसान को पापी समझा जाता था. ऐसे में इस तरह की फ़िल्में नहीं बनाई जाती थी. लेकिन बदलते समय के साथ प्रशंसक ऐसी फिल्मों की मांग करने लगे.

बदलते समय के साथ फिल्मों ने अपनी तय सीमा की हद पार की

प्रशंसक द्वारा ऐसी फिल्मों के मांग होने के बाद फिल्म में प्रेमी- प्रेमिका की सीमा एक पेड़ तक या फिर दो फुलों तक आ कर सिमीत हो जाती थी. लेकिन ऐसे में भी कुछ फिल्मों ने अपनी तय सीमा की हद पार कर दी थी.

फिल्मों में कुछ दृश्य ऐसे भी थे जिसके कारण सैंसर बोर्ड को उन पर प्रतिबंध लगाना पड़ा। भारतीय इतिहास में बनी ऐसी फिल्मों को सेंसर बोर्ड के बैन करने के बाद वो फिल्में कभी पर्दे पर नहीं आ सकी.

आइए आपको बताते हैं टॉप 5 फिल्में, जिन्हें सेंसर बोर्ड ने बैन किया था…

बैंडिट क्वीन (1994)

यह फिल्म दबंग रानी, फूलन देवी के जीवन पर आधारित है. फिल्म में सिर्फ ‘अश्लीलता’ व ‘अशिष्टता’ देखने को मिलेगी। इस फिल्म में इतनी अश्लिलता दिखाई गई थी कि सेंसर बोर्ड ने तुरंत इसे बैन कर दिया। फिल्म के निर्देशक शेखर कपूर थे. फिल्म में यौन संबंध, नग्नता और अपमानजनक भाषा को दिखाया गया था.

कामसूत्र – ए टेल ऑफ लव (1996)

फिल्म निर्देशक मीरा नायर ने “कामासूत्र – ए टेल ऑफ़ लव” का निर्देशन किया था. इस फिल्म में भी ‘अश्लिलता’ और ‘अनैतिकता’ दिखाई गई थी. फिल्म में भारत के 16वीं सदी में चार प्रेमियों के जीवन पर फ़िल्माया गया था. इसलिए सेंसर बोर्ड ने इस फिल्म को बैन कर दिया.

द पिंक मिरर (2003)

साल 2003 में असामान्य लिंग वाले इंसानों के जीवन पर फ़िल्माया गया था. फिल्म के निर्देशक श्रीधर रंगायण थे. फिल्म कामुकता की अवधारणा पर आधारित थी, फिल्म दो ट्रांसस्कोल और एक समलैंगिक किशोरी की है. फिल्म में दर्शाई गई ‘अश्लीलता’ से नाराज़ होकर इसे बैन कर दिया।

सिंस (2005)

यह फिल्म केरल के पाप की कामुक यात्रा पर आधारित है जो एक महिला की ओर आकर्षण हो जाता है और उनके बीच यैन संबंध बनने लगते हैं. जुनून और वासना से भरी यह फिल्म पाप और समाज के बीच होते संघर्ष को दर्शाता है. फिल्म एक कैथोलिक धर्म पर आधारित है. इसलिए सेंसर बोर्ड को लगा कि इससे कैथलिक धर्म का अपमान होगा और बोर्ड को फिल्म में दर्शाई गई नग्न दृश्यों से भी समस्या थी. इसलिए फिल्म को बैन कर दिया गया.

गांडू (2010)

यह फिल्म बंगाली भाषा में बनी थी. फिल्म में एक रैप संगीत द्वारा मौखिक सेक्स दृश्यों को बड़ी ही नग्नता के साथ दर्शाया गया है. फिल्म ब्लैक-एन-वाइट रूप में बनाई गए थी. इसलिए सेंसर बोर्ड ने इसे बैन कर दिया।