स्कूल की दोस्ती होती है खास! झोपड़ी में रह रहा था स्कूल फ्रेंड, दोस्त ने नया घर बनवा दिया दिवाली गिफ्ट

दोस्त का रिश्ता अपनेआप में बेहद ख़ास होता हैं. कई बार हम ज़िन्दगी में आगे बढ़ जाते हैं और यही दोस्त पीछे रह जाते हैं. लेकिन कभी उनका ख्याल मन में आता है तो चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. ऐसी ही एक ख़ूबसूरत कहानी में, कुछ स्कूल फ्रेंड्स ने मिलकर अपने एक दोस्त को घर गिफ्ट किया.

मुथुकुमार और नागेंद्रन दोनों दोस्त हैं

स्कूल की दोस्ती होती है खास! झोपड़ी में रह रहा था स्कूल फ्रेंड, दोस्त ने नया घर बनवा दिया दिवाली गिफ्ट

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मुथुकुमार और नागेंद्रन दोनों दोस्त हैं. लॉकडाउन ने 44 वर्षीय ट्रक चालक मुथुकुमार को आर्थिक रुप से प्रभावित किया. लॉकडाउन से पहले तक वो लगभग 10,000-15,000 रुपये कमा लेते थे. लेकिन, लॉकडाउन में ऐसे हालात हो गए कि वह मुश्किल से एक- दो हज़ार ही कमा पा रहे थे. वह एक झोपड़ी में रह रहे थे और उन्हें परिवार के 6 लोगों के लिए खाने का इंतज़ाम भी करना था.

मुथुकुमार ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “मैं जिस घर में पैदा हुआ था, मैं तब से उसी घर में रह रहा हूं. मेरे घर के आसपास के पेड़ दो साल पहले चक्रवात के दौरान गिर गए थे और तब से मेरा घर बुरी हालत में है. इसे ठीक कराने के मेरे पास पैसे नहीं हैं.”

सितंबर में, मुथुकुमार अपने स्कूल के दोस्त नागेंद्रन से उनके घर मिलने गए. बैठक के बाद, मुथुकुमार ने उसे अपने घर बुलाया. जब नागेंद्रन ने अपने दोस्त के घर की हालत देखी, तो वह बहुत परेशान हुआ. उन्होंने तुरंत अपने TECL हायर सेकेंडरी स्कूल पुदुक्कोट्टई के दोस्तों के व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए फंड जुटाया.

30 साल बाद अपने दोस्त से मुलाकात की

स्कूल की दोस्ती होती है खास! झोपड़ी में रह रहा था स्कूल फ्रेंड, दोस्त ने नया घर बनवा दिया दिवाली गिफ्ट

नागेंद्रन ने कहा, “मैंने स्कूल खत्म होने के लगभग 30 साल बाद अपने दोस्त से मुलाकात की. मैं उसके घर की हालत देखकर व्यथित था. गाजा चक्रवात ने उनके घर और उनके घर की छत के आसपास के पेड़ों को नष्ट कर दिया था. घर में प्रवेश करने के लिए भी झुकना पड़ता है. मुझे पता था कि मुझे उसे मदद की ज़रूरत है. मैंने एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया और उसके घर की तस्वीरें और वीडियो भेजे. कई लोग उसकी मदद के लिए आगे आए.”

उनके परिवार को दीवाली उपहार के रूप में घर  दिया

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बिना किसी इंजीनियर की मदद के नागेंद्रन और उनके दोस्तों ने महज तीन महीने में 1 लाख 50 लाख रुपये की लागत से घर बना लिया. उन्होंने मुथुकुमार और उनके परिवार को दीवाली उपहार के रूप में घर सौंप दिया. नागेंद्रन ने कहा, भले ही हम संपर्क में नहीं हैं, लेकिन स्कूल के दोस्त हमेशा स्पेशल होते हैं. हम सभी को अपने दोस्तों की ज़रूरत में मदद करनी चाहिए. लॉकडाउन के दौरान कई लोगों को नुकसान उठाना पड़ा है. यदि आप किसी ऐसे दोस्त को जानते हैं जो संकट में है, तो कृपया उनकी मदद के लिए कुछ करें.

My name is supriya .i am from ballia. I have done my mass communication from govt. polytechnic lucknow.in my family, there are 5 members including me.My mother house maker.my strengths are self confidence,willing...