कुत्ते को शोरूम में मिली नौकरी, काम मिलते ही बढ़ा दी बिक्री
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कार शोरूम में कुत्ता करता है ग्राहकों से डील, बिक्री में हुआ इजाफा

कुत्तों को आपने घरों में देखा होगा, क्योंकि कई लोगों को कुत्ते पालने का शौक होता है। लेकिन क्या आपने किसी ऑफिस में कुत्ते को जॉब करते देखा है।

रियो डी जेनेरियो- कुत्तों को आपने घरों में देखा होगा, क्योंकि कई लोगों को कुत्ते पालने का शौक होता है। लेकिन क्या आपने किसी ऑफिस में कुत्ते को जॉब करते देखा है। नहीं तो ये खबर आपको बहुत हैरान करने वाली है। ब्राजील में एक आवारा कुत्ते को हुंडई के शोरूम में नौकरी दी गई है। हुंडई की प्राइम ब्रांच के कर्मचारियों ने कुत्ते को प्रॉफेशनल सलाहकार के रूप में ऑफिस में काम पर रखा है।

शोरूम के बाहर बैठा रहता था कुत्ता

ब्राजील में हुंडई प्राइम ब्रांच के कर्मचारियों ने एक कुत्ते को शोरूम के बाहर इंतजार करते देखा। उन्होंने सोचा कि ये चला जाएगा। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया उसका दिखना जारी रहा और एक विशेष रूप से बरसात की रात में। शोरूम के मैनेजर इमर्सन मारियानो ने उसपर दया की और उसे कुछ भोजन और पानी दिया। कुत्ते ने कर्मचारियों के दिलों को जीतने में देर नहीं लगाई। आखिरकार कुत्ते को डीलरशिप मास्कट के रूप में अडाप्ट कर लिया गया।

शोरूम की डीलरशिप में किया सुधार

शोरूम के कर्मचारियों ने उसे टक्सन प्राइम नाम दिया। इसके अलावा उसे एक स्टाफ आईडी बैज भी दिया गया है और प्रशिक्षण भी दिया। शोरूम के मैनेजर ने बताया कि टक्सन की ग्राहकों की देखभाल के बारे में प्रतिक्रिया बेहद सकारात्मक थी और उसने अपने बहुत ही देखभाल और विनम्र स्वभाव के साथ डीलरशिप में सुधार किया है।

इससे पूर्व भी हैं वफादारी की मिसालें

जापान में एक प्रोफेसर ने एक कुत्ते (हचीको) को पाला था। कुत्ता रोज उन्हें स्टेशन छोड़ने जाता फिर वहीं उनके लौटने का घंटों इंतजार करता था। जब प्रोफेसर काम से वापस लौटते तो हचीको उन्हें लेकर घर आता। इन दोनों के लिए ये एक नियमित दिनचर्या बन गई थी। एक दिन रोज की तरह हचीको प्रोफेसर को छोड़ने गया और स्टेशन पर बैठ कर इंतजार करने लगा। दुर्भाग्य से उसी दिन प्रोफेसर की यूनिवर्सिटी में लेक्चर के दौरान ब्रेन हैमरेज से मौत हो गई। लेकिन अपने मालिक की मौत से अनजान हचीको उनका स्टेशन पर उनका इंतजार करता रहा। सुबह-शाम वो प्रोफेसर की ट्रेन का बेसब्री से इंतजार करता पर ट्रेन से प्रोफेसर को न निकलता देख उदास होकर वापस चला आता। हचीको ने ये काम 9 साल, 9 महीने और 15 दिन तक लगातार किया।