11 महीने के बच्चे को घर छोड़ इतनी ठंड में मजदूरों के साथ नीचे जमीन पर बैठी डिप्टी कलेक्टर, दिलाया उनका हक

कोई भी व्यक्ति यदि सरकारी पद पर कार्यरत है, तो उसका फर्ज होता है कि, वह जनता की सेवा करे। इसी तरह मध्यप्रदेश के बैतूल की महिला डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे जनता की सेवा करना और अपना फर्ज निभाना बेहतर तरीके से जानती हैं। हाल ही में निशा ठंड के कहर में मजदूरों की परेशानियां दूर करने के लिए उनके पास जाकर साथ बैठ गई। हैरानी की बात यह है कि, महिला डिप्टी कलेक्टर निशा अपने मात्र 11 महीने के बच्चे को घर पर छोड़ कर मजदूरों के साथ बैठी थी।

11 महीने के बच्चे को घर छोड़ इतनी ठंड में मजदूरों के साथ नीचे जमीन पर बैठी डिप्टी कलेक्टर, दिलाया उनका हक

मजदूरों के बच्चों को बांटे चॉकलेट और बिस्किट

दरअसल यह मजदूर बैतूल जिले के वन विभाग के हैं, जहां पर उन्हें मजदूरी के पैसे नहीं मिले। इस बात से निराश होकर उन सब ने बैतूल कलेक्टर के सामने धरना देने का फैसला किया। इसी दौरान महिला डिप्टी कलेक्टर ने मजदूरों के बच्चों के साथ वहां बैठकर उन्हें चॉकलेट, बिस्किट, नमकीन इत्यादि बांटे हैं। शुरुआत में तो इन मजदूरों को काफी तनाव रहा, लेकिन महिला डिप्टी कलेक्टर निशा की सहायता मिलने के बाद सभी के चेहरे खिल उठे।

11 महीने के बच्चे को घर छोड़ इतनी ठंड में मजदूरों के साथ नीचे जमीन पर बैठी डिप्टी कलेक्टर, दिलाया उनका हक

मजदूरी न मिलने पर धरने पर बैठे मजदूर

धरना देने वाले सभी मजदूर बैतूल के वन विभाग के लिए वृक्षारोपण का काम करते थे। जिसके बाद इन्हें वन विभाग की तरफ से पैसे नहीं दिए गए। पैसे ना मिलने के कारण कटनी जिले के सैकड़ों मजदूर अपने बच्चों और पत्नियों के साथ बैतूल कलेक्टर के सामने धरना देने के लिए बैठ गए। मामले की जानकारी मिलने के बाद कलेक्टर राकेश सिंह ने इसकी जांच के आदेश डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे को दिए।

जांच के दौरान ही उन्हें मजदूरों से पता चला कि, 28 मजदूर वन विभाग द्वारा सालबर्डी बीट के जंगल में पौधारोपण के लिए गड्ढे खोदने का कार्य कर रहे थे। जिसके बाद इन मजदूरों का 1 लाख 96 हजार की मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया। इसी बात से गुस्साए मजदूरों को धरने पर बैठना पड़ा।

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डिप्टी कलेक्टर निशा ने दिलवाया मजदूरों का बकाया भुगतान

मजदूरों की समस्या सुनने के बाद डिप्टी कलेक्टर ने जब वन विभाग से भुगतान न किए जाने का कारण पूछा तो पता चला कि, मजदूरों को विशेष साइज के गड्ढे खोदने के आदेश दिए गए थे। लेकिन उन्होंने ऐसा ना करके गलत साइज के गड्ढे खोद डालें। जिस वजह से तकनीकी कारणों के कारण उनका भुगतान करने में देरी हुई है।

फिलहाल, महिला डिप्टी कलेक्टर निशा ने मजदूरों की समस्या दूर करने के लिए पूरी कोशिश की। वन विभाग की टीम कलेक्ट्रेट देर रात पहुंची और सभी मजदूरों का बकाया भुगतान कर दिया। निशा के इस सराहनीय कार्य को लेकर सभी उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे।

Urvashi Srivastava

मेरा नाम उर्वशी श्रीवास्तव है. मैं हिंद नाउ वेबसाइट पर कंटेंट राइटर के तौर पर...