अशोक कुमार

कहते हैं कि अगर आपके मन में सच में कुछ करने की लगन है तो आप वो सब कर सकते हैं, जो आप सोच सकते हैं. इस बात को सच कर दिखाया है हरियाणा राज्य के हिसार शहर में रहने वाले अशोक कुमार ने, जिनके पिता एक मामूली आटा चक्की चलाते है. इस युवक का नाम अशोक कुमार है, जिसका चयन भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के लिए हुआ है, इस युवक की कामयाबी के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी स्कीम का बड़ा योगदान रहा है.

पिता चलाते हैं आटा चक्की

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आपको बता दें अशोक कुमार के पिता आटा चक्की चलाने के मामूली काम करते हैं, जिसके चलते उनके घर में सीमित संसाधन ही थे. लेकिन वही जब अशोक कुमार आज भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में न्यूक्लिअर साइंसटिस्ट बन गये है, तो उनके पिता मांगेराम को उनपर गर्व हैं.

अपनी खुशी को जाहिर करते हुए उन्होंने कहा, ‘अशोक शुरू से ही पढ़ाई में होनहार रहा है.  पैसे के अभाव चलते अशोक को गांव के ही सरकारी स्कूल में पढ़ाया और अपनी प्रतिभा की बदौलत अशोक आगे बढ़ा है’.

अशोक कुमार ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता को दिया है. अशोक अपने घर में तीन भाई बहनों में सबसे बड़े है. अशोक बचपन से ही अब्दुल कलाम को टीवी पर देखकर बहुत प्रभावित होते थे. जिसके चलते उन्होंने सपना देखा था कि वह बड़े होकर अब्दुल कलाम जैसे बड़े वैज्ञानिक बनेंगे.

अशोक कुमार ने पढाई के लिए छोड़ दिया घर

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अशोक कुमार ने बताया है कि उन्होंने साल 2019 में इंजीनियरिंग के पढाई हेतु अपना गाँव छोड़ने का फैसला कर लिया था. अशोक कुमार के मुताबिक वह पुरे 2 साल अपनी पढाई और एग्जाम की तैयारी करने के लिए घर से दूर रहे थे.

गाँव किरमारा में उनकी मौसी का घर हैं जो उनके कॉलेज के पास था तब उन्होंने अपनी मौसी के घर पर रहकर पढाई करने का फैसला लिया. क्योंकि उनके मौसी का घर में कम सदस्य होने के साथ एकांत भी था. आपको जानकर हैरानी होगी कि अशोक कुमार ने बिना इंटरनेट के केवल अखबार पढकर  ही इस मुकाम को हासिल किया है.

16 जनवरी से होगी ट्रेनिंग शुरू

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भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के वैज्ञानिक पद के चयन के लिए अशोक कुमार ने दिसंबर के बाद दिसंबर के महीने में इन्टरव्यू भी क्लियर कर लिया. इस परीक्षा में अशोक कुमार ऑल इंडिया में दूसरी रैंक हासिल कर ली है. मालूम हो 5 जनवरी को इस परीक्षा का परिणाम घोषित कर सिया गया था. जिसमें अशोक कुमार सहित पुरे भारत से कुल 30 छात्रों का चयन हुआ है, और 16 जनवरी से उनकी ट्रेनिंग भी शुरू होने वाली है.

मोदी सरकार की स्कीम से बनी वरदान

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आपको बता दें अशोक कुमार के लिए देश के प्रधानमंत्री मोदी की एक योजना वरदान बन गयी थी. दरअसल नरेंद्र मोदी की तरफ से साल 2014 में एक योजना शुरू की गयी थी, इस योजना का नाम ‘कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी स्कीम’ है. क्योंकि अशोक के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी तब ऐसे में मोदी द्वारा शुरू की गयी योजना ने उनकी बहुत मदद की.

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