भारतीय दस्तावेज की सुरक्षा करता है डिफेन्स साइबर एजेंसी
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भारतीय दस्तावेज की सुरक्षा करता है डिफेन्स साइबर एजेंसी, जानिए डिटेल्स

मुंबई : आजकल पूरी दुनिया में साइबर क्राइम ने सबकी नाक में दम करके रखा हुआ है. जिससे निपटने के लिए भारत ने एक डिफेंस साइबर एजेंसी बनाया है. इस साइबर एजेंसी को तीनों सेना के स्टाफ ने बनाया है. इसका ऑफिस दिल्ली में है. इस एजेंसी के द्वारा चीन के द्वारा किए जा रहे साइबर अटैक का पता लगाया जा सकता है और उनको जवाब दिया जा सकता है. इस एजेंसी का काम ट्राई सर्विस कमांड का है. इस एजेंसी में दो तरह के काम किए जाते हैं. इस एजेंसी के कमांडर रियर एडमिरल मोहित गुप्ता हैं.

यह एजेंसी हमारे डाक्यूमेंट्स की रक्षा करता है

यह एजेंसी हमें साइबर अटैक से हमारी संवेदनशील जानकारियों की रक्षा करती है और दूसरा कोई अगर इसमें सेंध लगाने की कोशिश करता है तो ये साइबर कमांड उसे भरपूर जवाब भी देता है. कोई भी हमारे देश की किसी भी तरह की जानकारी पर नज़र नहीं रख सकती है और अगर ऐसा होता है तो हमारी एजेंसी उसे तुरंत मुहतोड़ जवाब भी देती है.

हैकर्स हमारे दस्तावेज को चुरा कर हमारे पुरे सिस्टम को ब्लॉक कर सकते हैं

बता दें कि साइबर अटैक मिसाइल से भी ज्यादा खतरनाक वेपन है. हमारे देश में कई बार साइबर अटैक हो चुकें हैं. अभी हाल ही में चीन ने हमारे देश के दस्तावेजों को चुराने की कोशिश की थी. भारत के डिफेंस, एनर्जी, स्ट्रैटजिक दस्तावेज को चुरा कर वो हमारा बड़ा नुकसान कर सकते हैं साथ-ही हमारे पुरे सिस्टम को भी ब्लॉक कर सकता है. इस समस्या के हल में भारतीय सेना के तीनों बटालियन ने डिफेंस साइबर एजेंसी का निर्माण किया है.

इस एजेंसी के द्वारा किसी भी समस्या का हल बड़ी आसानी से मिल जाता है

इस एजेंसी के अनलिमिटेड अधिकार है. इस साइबर एजेंसी के द्वारा पता लगाया जा सकता है कि कौन हमारे दस्तावेज पर नज़र रख रहा है. यह एजेंसी किसी भी तरह का सर्विलेंस आपरेशन कर सकता है. साइबर समस्या से जुड़ें किसी भी समस्या का हल तुरंत और बड़ी आसानी से कर सकता है. यह एजेंसी हमारे देश को हैकिंग सिस्टम से हमारी सुरक्षा करता है.

साइबर एजेंसी का दायर धीरे-धीरे देशभर में बढ़ाया जाएगा

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से खबर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कम्बाइंड कमांडर कॉन्फ्रेंस में डीसीए, स्पेशल फोर्स और स्पेस एजेंसी के गठन को हरी झंडी दी थी. साइबर एजेंसी का दायर धीरे-धीरे देशभर में बढ़ाया जाएगा, जहां यूनिट में साइबर सिक्युरिटी हेड तैनात किए जाएंगे.