खुद का स्टार्टअप शुरू करने के लिए बैंक की नौकरी छोड़ दी, दूसरो को रोजगार प्रदान कर रहा युवा उद्यमी

रतहरा के रहने वाले शंभू पटेल के दूसरे बेटे अभिषेक चंदानन ने खुद का स्टार्टअप शुरू करने के लिए बैंक में सेल्स ऑफिसर की नौकरी छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने डेढ़ साल तक स्वयं मशीन को आपरेट किया। उन्होंने 2 साल लगातार मेहनत करके करोड़ों की इंडस्ट्री खड़ी की। इतना ही नहीं अब वह दूसरों को भी रोजगार प्रदान कर उनकी सहायता कर रहे हैं।

खुद का स्टार्टअप शुरू करने के लिए बैंक की नौकरी छोड़ दी, दूसरो को रोजगार प्रदान कर रहा युवा उद्यमी

एमबीए करने के बाद मिली थी बैंंक में नौकरी

अभिषेक चंदानन ने शहर में ही महर्षि विद्या मंदिर से पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने इंदौर से ग्रेजुएशन के बाद एमबीए की पढ़ाई पूरी की। साल 2014 में पढ़ाई पूरी होने के बाद उनकी बैंक में नौकरी लग गई। यहां पर उन्हें अच्छी सैलरी मिल रही थी, लेकिन अभिषेक ने साल 2017 में खुद का स्टार्टअप करने के लिए बैंक की नौकरी छोड़ दी।

इसके बाद उन्होंने विभिन्न शहरों में सर्वे करना शुरू कर दिया। सर्वे के बाद अभिषेक ने चैन लिंक फेंसिंग की मैन्युफैक्चरिंग का काम शुरू करने का विचार किया। जिसके लिए उन्हें तीन लाख रुपए की जरूरत थी।

तीन लाख रुपए में सेमी ऑटो मशीन ली

चैन फेसिंग की मैन्युफैच्रिंग वाली मशीन के बारे में सीखने और पूरी जानकारी के लिए उन्होंने स्टार्टअप से पहले ही गुजरात, छत्तीसगढ़ और मुंबई में कई कारखानों में चक्कर भी लगाए थे। साल 2018 मई में अभिषेक ने तीन लाख रुपए में सेमी ऑटो मशीन खरीद ली।

पूरे डेढ़ साल तक उन्होंने खुद ही रात दिन मेहनत कर के इस मशीन को ऑपरेट किया। इसके बाद अभिषेक ने 5 युवाओं को अपने साथ लगा लिया। रोजगार देने वाले 5 युवाओं में से उन्होंने एक को ऑपरेटर मनाया।

मुद्रा योजना के तहत 46 लाख ऋण लिया

अभिषेक चंदानन ने मुद्रा योजना के तहत दो अलग-अलग बैंकों से 46 लाख रुपए का ऋण लिया। जिसके बाद बैंक की सहायता से उनका कारोबार और भी आगे बढ़ सका। वर्तमान समय में अभिषेक ने करोड़ों की इंडस्ट्री खड़ी कर ली है और साथ ही साथ उनका एक करोड़ से भी अधिक का टर्नओवर भी है।

खुद का स्टार्टअप शुरू करने के लिए बैंक की नौकरी छोड़ दी, दूसरो को रोजगार प्रदान कर रहा युवा उद्यमी

इससे अधिक युवाओं को दिया रोजगार

अभिषेक ने एक मशीन से काम शुरू किया था। जिसे बढ़ाकर अब तीन मशीनें लगा दी। 2 साल के अंदर उन्होंने बाजार की मांगों को पूरा करने के लिए रात दिन कड़ी मेहनत की। अब वह तारबाड़ी, जाली जैसी चीजों की मैन्युफैक्चरिंग का काम कर रहे हैं। अभिषेक खेत में बाउंड्री बनाने के लिए चैन फेंस तैयार करते हैं।

अभिषेक एक युवा उद्यमी बन गए और उन्होंने 30 से भी अधिक लोगों को 3 साल के भीतर रोजगार प्रदान करके सहायता की। अभिषेक का कहना है कि, नौकरी करने से बेहतर है कि, खुद का कारोबार किया जाए। कारोबार छोटा हो या बड़ा हो लेकिन मेहनत करना आवश्यक है।

Urvashi Srivastava

मेरा नाम उर्वशी श्रीवास्तव है. मैं हिंद नाउ वेबसाइट पर कंटेंट राइटर के तौर पर...