ये है देश का मोस्ट वांटेड अपराधी, 2.5 करोड़ का है इनाम, कई राज्यों की पुलिस कर रही तलाश
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दाउद नहीं ये है देश का मोस्ट वांटेड क्रिमिनल, 2.5 करोड़ का है ईनाम

अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फिल्म डॉन का वो संवाद तो आपको याद होगा, जिसमे डॉन बने अमिताभ बच्चन कहते हैं कि "डॉन को तो 14 मुल्कों की पुलिस ढूंढ रही है...

नई दिल्ली- अमिताभ बच्चन की सुपरहिट फिल्म डॉन का वो संवाद तो आपको याद होगा, जिसमे डॉन बने अमिताभ बच्चन कहते हैं कि “डॉन को तो 14 मुल्कों की पुलिस ढूंढ रही है पर डॉन को पकड़ना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हैं”। ठीक इसी प्रकार देश में खतरनाक अपराधी अब तक फरार है उस अपराधी को कई राज्यों की पुलिस ढूंढ रही है। पर अब तक वो पुलिस की पकड़ से बाहर है। आइए आज हम आपको इस अपराधी के बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं।

डॉन दाऊद इब्राहिम से ज्यादा इनाम

गणपति देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए कितना बड़ा खतरा है, इसका मोटा अंदाजा इसी बात से लग जाता है कि उसके सिर पर अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से ज्यादा इनाम था। खूंखार माओवादी नेता गणपति उर्फ मुप्पला लक्ष्मण राव के बारे में कई बार मौत तक की खबरें आ चुकी हैं पर हर बार किसी बड़ी माओ गतिविधि के बाद फिर से उसका नाम सामने आ जाता आता है। अब कहा जा रहा है कि ये माओ नेता जल्द ही तेलंगाना पुलिस के आगे सरेंडर कर सकता है।

5 राज्यों की पुलिस कर रही तलाश

गणपति देश के कई राज्यों के लिए मोस्ट वॉन्टेड व्यक्ति रहा है। सीपीआई (माओवादी) के इस पूर्व महासचिव की तलाश पिछले एक दशक से छत्तीसगढ़ से लेकर महाराष्ट्र, उड़ीसा, झारखंड, बिहार की पुलिस कर रही है। पर वो कानून के शिकंजे से बाहर खुली हवा में सांस ले रहा है।

कई लेयर की सुरक्षा में रहता है घिरा

इस माओवादी नेता की सुरक्षा बेहद जांबाज और जंगलों-पहाड़ों में लड़ाई लड़ने में तेज गुरिल्ला गार्ड्स करते हैं। यहां तक कि वो कई परतों की सुरक्षा में घिरा रहता है, जैसी देश के बड़े-बड़े राजनेताओं को मिलती है। ऐसे में सुरक्षा घेरा तोड़कर उस तक पहुंच पाना नामुमकिन है। गणपति की तलाश नेशनल इंवेस्टगेशन एजेंसी को भी है। पर हर बार ये माओवादी नेता चकमा देकर अंडरग्राउंड हो जाता है।

हर राज्य ने इस माओ नेता पर अलग-अलग इनाम रखे हैं। इस तरह से गणपति 2.5 करोड़ से ज्यादा की रकम के साथ देश का सबसे बड़ा इनामी अपराधी हो गया। उसने पास मुखबिरों की अपनी फौज भी थी। इससे उस तक पहुंचने की कोई कोशिश कामयाब नहीं हो पाती थी।

सैकड़ों लोगों की हत्या का जिम्मेदार है ये कुख्यात

गणपति साल 1995 में वो पहली बार तब चर्चा में आया, जब उसने एक DSP समेत 25 लोगों की गाड़ी को विस्फोट कर उड़ा दिया। सभी लोग घटनास्थल पर ही मारे गए थे। इसके बाद गणपति ने साल 2006 में सलवा जुडूम अभियान का मुकाबला करने के लिए बस्तर के एर्राबोर क्षेत्र में 35 आदिवासियों की हत्या कर दी।

साल 2006 में ही उसने उपलेटा कैंप में 22 पुलिसकर्मियों की बेरहमी से हत्या की थी और 14 नागा सैनिकों को ले जा रहे एक वैन का उड़ा दिया था। वर्ष 2008 में उसने सीआईएसएफ के आठ जवान मार डाले।

आत्मसमर्पण की हो रही चर्चा

कुख्यात अपराधी गणपति इस समय काफी बीमार है और आत्मसमर्पण करना चाहता है। इस खबर के आते ही पुलिस और माओवादियों में खलबली मच गई। माओवादियों ने एक प्रेस रिलीज जारी करके कहा कि ये सच है कि उनके इस नेता ने दो साल पहले सेहत के चलते पार्टी छोड़ दी लेकिन उनके सरेंडर की बात झूठ है और समूह को बदनाम करने की कोशिश है। वहीं पुलिस भी इन खबरों पर यकीन नहीं कर पा रही है।

पुलिस का कहना है कि गणपति काफी ताकतवर है, अगर गणपति की सेहत खराब है तो वो चाहे तो जंगल में ही अपने लिए बढ़िया डॉक्टर का इंतजाम कर सकता है, जैसा माओ करते हैं। यहां तक कि वो लोग जंगल के भीतर ही ICU बना सकते हैं। ऐसे में खराब सेहत के चलते सरेंडर की, बात उतनी भरोसे की नहीं लगती। वहीं दूसरी ओर कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी गणपति के आत्मसमर्पण की बात से खुश हैं। उनका कहना है कि पुलिस के हत्थे चढ़ने के बाद वो कई खूंखार हमलों की जानकारी दे सकेगा।