जानिए कब है महाशिवरात्रि, पूजा का सही समय, विधि और व्रत कथा
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जानिए कब है महाशिवरात्रि, पूजा का सही समय, विधि और व्रत कथा

हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पावन पर्व बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता. वैसे तो महाशिवरात्रि साल में एक बार ही मनाई जाती है, लेकिन इसके अलावा साल में कई शिवरात्रि अभी आती हैं. महाशिवरात्रि प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती. साल में जो एक बार शिवरात्रि आती है, उस फाल्गुन महीने की मासिक शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कह जाता है.

महाशिवरात्रि का पावन पर्व भगवान शिव शंकर को समर्पित है. हिंदी पंचांग के अनुसार अश्विनी मास की शिवरात्रि बहुत ही स्पेशल मानी जाती है. हम आपको बता दें कि पितृपक्ष में शिवरात्रि का पड़ना एक बहुत ही बड़ा महत्व माना जाता.

 

तो आइए अब हम जानते हैं कि इस महीने की महाशिवरात्रि कब है?

कब पड़ रही है इस महीने की महाशिवरात्रि

हिंदी पंचांग के अनुसार 15 सितंबर 2020 को अश्विन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को इस माह की महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा. महाशिवरात्रि का त्यौहार भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के संगम का त्यौहार है. यह पावन पर्व उपासना करने वाले की इंद्रियों को नियंत्रण करने में मदद करता है. जो भी व्यक्ति लालच, दूसरों की बुराइयां और गलत काम करता है, उसे भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त नहीं होता है. शास्त्रों के कहे अनुसार भगवान शिव का साप्ताहिक व्रत सोमवार के दिन रखा जाता है.

भगवान शंकर की पूजा का महत्व

अश्विनी मास को चातुर्मास का तृतीय मास कहते हैं. एक मान्यता के अनुसार यह कहा गया है कि, ”चातुर्मास में भगवान विष्णु पाताल लोक में विश्राम करने के लिए चले जाते हैं. इन महीनों में भगवान शंकर धरती की सारी बागडोर भगवान भोलेनाथ को सौंप देते हैं.” कहा जाता है कि चतुर्मास में भगवान शंकर माता पार्वती के साथ धरती का भ्रमण करने के लिए चले जाते हैं, और साथ ही साथ अपना आशीर्वाद भक्तों को प्रदान करते हैं. यही कारण है कि अश्वनी मास की शिवरात्रि को विशेष महत्व प्राप्त है.

इस माह में महाशिवरात्रि का व्रत करने वाले व्यक्ति को क्रोध, ईर्ष्या, अभिमान और लालच जैसी भावनाओं पर नियंत्रण करने की शक्ति प्राप्त होती है. इस व्रत का उपवास और पूजा करने वाले व्यक्ति की हर बाधा दूर होती है और जीवन में सुख शांति की प्राप्त होती है.

महाशिवरात्रि में भगवान शिव का विधिपूर्वक व्रत करना चाहिए. व्रत करने वाले व्यक्ति का मानना होता है कि वह अपने अवगुणों का त्याग कर देगा और सदैव सत्य की राह पर चलेगा, क्योंकि शिव ही सत्य है.

महाशिवरात्रि की पूजा का सही समय

आरंभ– हम आपको बता दें कि इस माह में महाशिवरात्रि का त्यौहार 15 सितंबर 2020 को मनाया जाएगा. यह त्योहार 15 सितंबर की रात्रि 11:00 बजे से प्रारंभ हो रहा है.

पूजा का समय– महाशिवरात्रि की पूजा का समय 15 सितंबर रात 11:00 बजकर 54 मिनट से लेकर के 16 सितंबर को प्रात: 12 बजकर 40 तक है.

समापन– चतुर्दशी तिथि का समापन 16 सितंबर 2020 को है.

पूजन की सही विधि

व्रत वाले दिन जो भी व्यक्ति या व्रत कर रहा है उसे सुबह उठकर स्नान कर के साफ कपड़े पहनने चाहिए. स्नान कर लेने के बाद पूजा स्थल पर जाकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए. इसके बाद पूरा आरंभ करनी चाहिए. पूजा की शुरुआत करते हुए भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी का पूजन करना चाहिए. शिव चालीसा करना चाहिए और भगवान शिव के मंत्रों का जाप करना चाहिए.

हम आपको बता दें कि महाशिवरात्रि के दिन भगवान शंकर का अभिषेक करने से विशेष फल प्राप्त होता है. पूजा के दौरान भगवान शंकर की प्रिय चीजों का भोग लगाना चाहिए.

महाशिवरात्रि मासिक व्रत कथा

पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव महाशिवरात्रि के दिन आधी रात के समय शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे. भगवान शिव शंकर के इस रूप की सबसे पहले पूजा भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु ने की थी. उस दिन से आज तक इस विशेष दिन को भगवान शिव के जन्म दिवस के रुप में मनाया जाता है, जिसे सभी व्यक्ति बड़ी ही धूमधाम से मनाते हैं. इस विशेष दिन पर भगवान शिव की विशेष पूजन का महत्व है.

पुराणों में भी महाशिवरात्रि के व्रत का महत्व बताया गया है. धार्मिक ग्रंथों और शास्त्रों के अनुसार अपने जीवन का उद्धार करने के लिए माता लक्ष्मीं, माता सरस्वती, माता गायत्री, माता सीता, माता पार्वती तथा देवी रति जैसी बहुत-सी देवियों और रानियों ने भी इस महाशिवरात्रि का व्रत किया था।

हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का पावन पर्व सभी भक्तों बहुत ही धूमधाम से मनाते हैं. सभी भक्त भगवान भोलेनाथ की आराधना में लीन हो जाते हैं. भगवान शिव शंकर का यह त्यौहार भारत के किसी एक क्षेत्र में नहीं बल्कि पूरे देश में बड़ी ही धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है.