300 करोड़ के IPL स्पॉन्सरशिप के लिए BCCI ने निकाला टेंडर, ये हैं शर्तें
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300 करोड़ के IPL स्पॉन्सरशिप के लिए BCCI ने निकाला टेंडर, ये हैं शर्तें

इंडियन प्रीमियर लीग की स्पॉन्सरशिप को बीसीसीआई ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट के तहत टाइटल स्पॉन्सरशिप के लिए टेंडर जारी कर दिया है।

नई दिल्ली- इंडियन प्रीमियर लीग की स्पॉन्सरशिप को बीसीसीआई ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट के तहत टाइटल स्पॉन्सरशिप के लिए टेंडर जारी कर दिया है। बीसीसीआई को ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि इससे पहले वीवो ने इस साल के संस्करण के लिए अपने प्रायोजन समझौते से हाथ खींचने का फैसला कर लिया था।

आईपीएल वेबसाइट पर पोस्ट किए गए एक्सप्रेशंस ऑफ इंटरेस्ट के निमंत्रण में, बीसीसीआई ने कहा कि इच्छुक तीसरे पक्ष का टर्नओवर उनके अंतिम ऑडिट किए गए खातों के अनुसार 300 करोड़ रुपये से अधिक होना चाहिए। बोली के साथ जांचे गए खातों की प्रति भी जमा करनी होगी। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि मध्यस्थ या एजेंट इस प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकते और ऐसी बोलियां रद्द कर दी जाएंगी।

4-5 महीने का होगा करार

आईपीएल के स्पांसरशिप का ये करार 4-5 महीने के लिए होगा। बोलियां जमा करने की आखिरी तारीख 14 अगस्त है। अधिकार पाने वाले के नाम का ऐलान 18 अगस्त को किया जाएगा। यह जरूरी नहीं कि सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को ही अधिकार दिए जाएं।

पतंजलि समूह ने भी बोली लगाने में रूचि दिखाई

बीसीसीआई के अनुसार ईओआई तभी स्वीकार किया जाएगा जब तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) का टर्नओवर पिछले ऑडिट किए गए खातों के अनुसार 300 करोड़ रुपये से ज्यादा का हो। बोली के साथ जांचे गए खातों की प्रति भी जमा करनी होगी। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि मध्यस्थ या एजेंट इस प्रक्रिया में भाग नहीं ले सकते और ऐसी बोलियां रद्द कर दी जाएंगी। इससे पहले योग गुरु बाबा रामदेव के पतंजलि समूह ने भी बोली लगाने में रूचि दिखाई थी। आपको बता दें कि आईपीएल संयुक्त अरब अमीरात में 19 सितंबर से 10 नवंबर के बीच शारजाह, दुबई और अबुधाबी में खेला जायेगा।

वीवो के जाने से फर्क नहीं पड़ता

चीनी कंपनी वीवो से करार टूटने के बाद बीसीसीआई को प्रायोजन तलाशने में भी दिक्कत हो रही है। यह 440 करोड़ रुपये का करार था जो भारत और चीन के सैनिकों के बीच सीमा पर हुई हिंसक झड़प के कारण चीनी उत्पादों और कंपनियों के बहिष्कार की मांग के बीच इस साल के लिये रद्द कर दिया गया है। हालांकि बृजेश पटेल का मानना है कि वीवो का करार एक साल के लिए रद्द होने से बीसीसीआई को कोई फर्क नहीं पड़ा है।