Vivo को आईपीएल से हटाने पर बीसीसीआई ने सुनाया अपना अंतिम फैसला

नई दिल्ली- इंडियन प्रीमियर लीग के आगामी संस्करण में भी चीनी मोबाइल कंपनी से स्पॉन्सरशिप करार बरकरार रहेगा। यह फैसला आईपीएल की संचालन परिषद ने लिया। बीसीसीआई के इस रवैये के खिलाफ सोशल मीडिया पर कई लोगों ने विरोध जताया। जून के महीने में गलवान घाटी में दोनों देशों के बीच सीमा संघर्ष के बाद चीन विरोधी भावनाएँ भारत में उच्च स्तर पर चल रही थीं। चार दशक से अधिक समय में भारत-चीन सीमा पर पहली झड़प में कम से कम 20 भारतीय सैनिक मारे गए थे।

चीनी प्रायोजन बड़ा मुद्दा बन गया था। इतना ही नहीं, बड़ी संख्या में लोगों ने चीनी सामान का बहिष्कार करने की बात भी कही थी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने इसके बाद करार की समीक्षा का वादा किया था लेकिन आईपीएल में भी इस कंपनी को बरकरार रखने का फैसला किया गया

वर्चुअल बैठक में हुआ फैसला वीवो रहेगा प्रायोजक

Vivo को आईपीएल से हटाने पर बीसीसीआई ने सुनाया अपना अंतिम फैसला

आईपीएल की संचालन परिषद ने रविवार को चीनी मोबाइल कंपनी वीवो सहित सभी प्रायोजकों को बरकरार रखने का फैसला किया। आईपीएल संचालन परिषद (जीसी) ने रविवार को हुई ‘वर्चुअल’ बैठक में फैसला किया कि टूर्नमेंट 19 सितंबर से 10 नवंबर तक खेला जाएगा।

आईपीएल जीसी के एक सदस्य ने नाम नहीं बताने की शर्त पर पीटीआई से कहा, मैं सिर्फ यही कह सकता हूं कि हमारे सभी प्रायोजक हमारे साथ हैं। उम्मीद है आप समझ गए होंगे। बीसीसीआई के एक अधिकारी ने कहा था, प्रायोजक अनुबंध यानी स्पॉन्सरशिप करार में कोई बदलाव नहीं होगा जिसकी जानकारी शनिवार को ही दे दी गई थी। मौजूदा वित्तीय कठिन परिस्थितियों को देखते हुए इतने कम समय में बोर्ड के लिए नया प्रायोजक ढूंढना मुश्किल होगा।

चीनी कंपनियां केवल हमारे देश के हितों की सेवा करती हैं- बीसीसीआई कोषाध्यक्ष

बीसीसीआई कोषाध्यक्ष अरूण धूमल ने कहा कि आईपीएल जैसे इवेंट को प्रायोजित करने वाली चीनी कंपनियां केवल हमारे देश के हितों की सेवा करती हैं। बीसीसीआई को विवो से सालाना 440 करोड़ रुपये मिलते हैं और पांच साल का सौदा 2022 में खत्म होना है।

धूमल ने कहा,

जब आप भावनात्मक रूप से बात करते हैं, तो आप तर्क को पीछे छोड़ देते हैं। हमें चीनी कंपनी का समर्थन करने या चीनी कंपनी से भारत के कारण का समर्थन करने के बीच अंतर को समझना होगा। जब हम चीनी कंपनियों को भारत में अपने उत्पादों को बेचने की अनुमति दे रहे हैं, जो भी पैसा वे भारतीय उपभोक्ता से ले रहे हैं, वे इसका हिस्सा बीसीसीआई को दे रहे हैं (ब्रांड प्रचार के रूप में) और बोर्ड उस पैसे पर 42 प्रतिशत कर का भुगतान कर रहा है और वो भी भारत सरकार को। इसलिए बीसीसीआई भारत का समर्थन कर रही है और चीन का नहीं।

अगर वे आईपीएल का समर्थन नहीं कर रहे हैं, तो वे उस पैसे को वापस चीन ले जाने की संभावना रखते हैं। यदि वह पैसा यहां रखा जाता है, तो हमें इसके बारे में खुश होना चाहिए। हम उस पैसे के साथ हमारी सरकार का समर्थन कर रहे हैं उस पर करों का भुगतान करके।

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