कानपुर एनकाउंटर: Co मिश्रा की बेटी ने पिता को अंतिम विदाई देते हुए कहा- &Quot;गुंडों को वहीं भेजूंगी जहां से उनका वास्ता हैं&Quot;
ज़ब छोटी थी तो एक बार उसे डॉक्टर-डॉक्टर खेलता हुआ देख कर पिता ने सोच लिया कि अपनी दुलारी बिटिया को डॉक्टर ही बनाएंगे. बड़े होने पर बिटिया ने भी अपने पिता की भावनाओं को खूब समझा और डॉक्टर बनने की मन में ठान ली, लेकिन एक दुखद घटना ने उसके ह्रदय को इस कदर झकझोर दिया कि अब वह पुलिस अधिकारी बन अपराधियों का नाश करने की ठान ली है.
हम यहां बात कर रहे हैं कानपुर एनकाउंटर मामले में शहीद हुए सीओ देवेंद्र मिश्र की बड़ी बेटी वैष्णवी की. उसकी बचपन से ही ख्वाहिश थी कि वह डॉक्टर बन कर समाज सेवा करेगी, लेकिन कानपुर एनकाउंटर मामले में अपराधियों द्वारा बर्बरता से की गई पिता की हत्या ने उसकी जिंदगी के मकसद को बदल दिया.
अपने पिता के आखरी दर्शन कर सलूट करते हुए वैष्णवी ने सौगंध ली कि अब वह वर्दी पहनेगी और जहां से पिता का अंत हुआ वहीं से इस सफर की शुरुआत करेगी। असामाजिक तत्वों को सामने लाकर उन्हें उनकी सही जगह पहुंचाना ही लक्ष्य होगा।
 वैष्णवी ने कहा कि वह पिता की शहादत को जाया नहीं जाने देगी. भले ही इस घटना ने एक पल के लिए वैष्णवी को अंदर तक हिला कर रख दिया होगा, लेकिन फिर भी उसने खुद को एक चट्टान की तरह मज़बूत दिखाया और बड़ी ही बहादुरी के साथ उसने शपथ ली, जिसे देख मौजूद लोगों ने भी उसके पक्के इरादों की सराहना की. तो वहीँ छोटी बेटी ने आईएएस अधिकारी बन अपराधियों को उनकी सही जगह पहुंचाने की बात कही. बड़ी बेटी जहाँ बीएससी कर रही है तो छोटी कक्षा 12 मे है.  दोनों बेटियों ने मुख्यमंत्री से घटना की सीबीआई जाँच की मांग की है.

एक ओर जन्म दिन तो दूसरी ओर….पिता की अर्थी

शहीद सीओ देवेंद्र मिश्रा की छोटी बेटी वैशारदी का जन्म गुरु पूर्णिमा को हुआ था। इसलिए हर साल उसका जन्मदिन गुरुपूर्णिमा पर मनाया जाता था. मगर इस बार उसके जन्मदिन से पहले ही पिता शहीद हो गए. वह पिता को याद कर कर रोती रही. उसने कहा पापा गिफ्ट, केक लाते थे, लेकिन अब कौन ये सब करेगा.
गत वर्षो की बर्थडे सेलिब्रेशन की फोटो देख देखकर वह घंटों बिलखती रही. गौरतलब है कि गुरु पूर्णिमा इस बार 5 जुलाई को थी और इस घटना में सीओ देवेंद्र मिश्र 2 जुलाई की रात शहीद हुए थे. कानपुर चौबेपुर के बिकरू गांव में अपराधी विकास दुबे को दबोचने गई पुलिस पर विकास में अपने साथियों के साथ हमला बोल दिया था. जिसमें सीओ समेत आठ कर्मी शहीद हो गए थे.

2 जुलाई को सिलिंडर देने फ्लैट पर आए थे सीओ….फिर नहीं लौटे….

दो जुलाई की रात करीब आठ बजे पॉम कोर्ट अपार्टमेंट स्थित अपने 304 नंबर फ्लैट में सिलिंडर रखवाने सीओ आए थे। बेटी ने बताया पापा जल्दी में थे। फ्लैट के अंदर भी नहीं आए और बाहर से हम सभी से बात कर निकल गए, बोले जल्दी आ जायेंगे. जाते समय मम्मी ने खाना दिया था जिसे उन्होंने बिल्हौर में अपने आवास पर खाया। उनके घरेलू सहायक छोटू घर पर बताया था कि रात करीब 10 बजे खाना खाने के बाद ही किसी का फोन आया और साहब तुरंत अपनी गाड़ी में बैठकर निकल गए। उन्होंने जाते समय कुछ नहीं बताया था।

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