विकास दुबे के अपने ही बने दुश्मन, ये महिला खोलेगी सारा काला सच
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विकास दुबे के जाने के बाद उसके अपने ही बने दुश्मन, ये महिला खोलेगी सारा काला सच

दो-तीन जुलाई की मध्य रात्रि करीब दो बजे बिकरू गांव में कुख्यात अपराधी विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर उसके साथियों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थीं।

कानपुर- दो-तीन जुलाई की मध्य रात्रि करीब दो बजे बिकरू गांव में कुख्यात अपराधी विकास दुबे को पकड़ने गई पुलिस टीम पर उसके साथियों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई थीं। इस वारदात में बिल्हौर के तत्कालीन पुलिस क्षेत्राधिकारी देवेंद्र मिश्र, तीन दारोगा और चार कांस्टेबल मारे गए थे तथा छह अन्य पुलिसकर्मी जख्मी हुए थे।

इस मामले में कुल 21 ज्ञात तथा 60-70 अज्ञात बदमाशों क खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। मामले का मुख्य आरोपी विकास दुबे 10 जुलाई को उज्जैन से कानपुर लाते वक्त रास्ते में एसटीएफ के साथ हुई कथित मुठभेड़ में मारा गया था। बिकरू कांड में जेल गए शशिकांत पांडेय की पत्नी मनु पांडेय को पुलिस सरकारी गवाह बनाएगी। उसकी आंखों के सामने ही डीएसपी समेत तीन पुलिसकर्मियों की हत्या हुई थी। वारदात के पहले से लेकर बाद तक मनु की कई कॉल रिकॉर्डिंग वायरल हुईं थीं।

पूरी घटना की चश्मदीद गवाह है मनु

बिकरू कांड में गिरफ्तार किए गए विकास दुबे के ममेरे भाई शशिकांत पांडे की पत्नी मनु के मोबाइल की वायरल कॉल रिकार्डिंग पुलिस के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य है। दो जुलाई को हुई वारदात के समय घटनास्थल पर मनु की मौजूदगी, फोन पर बातचीत के दौरान विकास और उसके साथियों द्वारा पुलिसकर्मियों की हत्या की बात कहना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि मनु ने पूरी घटना देखी है।

मनु ने पुलिस को घटना का पूरा सच बताने की बात कही है। ऐसे में मनु का बयान, उसके वायरल ऑडियो अदालती कार्यवाही में कितने महत्वपूर्ण होंगे और साक्ष्य अधिनियम की कसौटी पर वह कितनी खरी उतरेगी ये अदालत में पता चलेगा।

आपराधिक घटना में शामिल होने के मनु के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं

पुलिस की जांच में आपराधिक घटना में शामिल होने के मनु के खिलाफ अभी तक साक्ष्य नहीं मिले हैं। लिहाजा पुलिस उसको सरकारी गवाह बनाएगी। इससे केस मजबूत होगा। बिकरू में दो जुलाई की रात जब विकास दुबे और उसके गुर्गों ने हमला किया था तो डीएसपी देवेंद्र मिश्र विकास के ममेरे भाई शशिकांत पांडेय के घर पर छिप गए थे। यहीं पर डीएसपी की हत्या कर दी गई थी। दो अन्य पुलिसकर्मियों को गेट पर मारा गया था। वारदात मनु के सामने हुई थी। इसकी पुष्टि उसके मोबाइल की वायरल कॉल रिकॉर्डिंग से हुई थी। पुलिस ने कॉल रिकॉर्डिंग के साथ ही मनु का वॉयस सैंपल भी फोरेंसिक लैब भेजा है।

मनु हत्या के षड्यंत्र के साथ सबूत मिटाने की दोषी भी ठहराई जा सकती है

विधि विशेषज्ञों के मुताबिक मनु के वायरल ऑडियो की विधि विज्ञान प्रयोगशाला से जांच कराई जाएगी। मनु की आवाज और वायरल ऑडियो में जो आवाज है उसके मिलान होने पर पुलिस ऑडियो को इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के रूप में पेश करेगी। मनु के घर में सीओ समेत दो पुलिसकर्मियों के शव मिले हैं।

साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 के तहत घर में शव कैसे आए, यह साबित करने का भार मनु पर ही होगा। उसे घटना की पूरी जानकारी थी, इसके बावजूद उसने तथ्यों को छिपाया। इसलिए मनु हत्या के षड्यंत्र के साथ सबूत मिटाने की दोषी भी मानी जा सकती है। घटना में मनु की गवाही को सबसे विश्वसनीय माना जाएगा।

अगर पुलिस मनु को सरकारी गवाह बनाकर कोर्ट में पेश करती है तो उस पर लगे आरोपों को माफ करने के लिए अदालत से याचना कर सकती है। सरकारी गवाह के रूप में मनु की सजा माफ की जाए या कम की जाए यह निर्णय करने का अधिकार अदालत को होगा। कानूनी भाषा में ऐसे गवाह को वायदा माफ गवाह कहा जाता है।