22 साल की उम्र में आदित्यनाथ ने इस शख्स की वजह से छोड़ा था घर
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इस शख्स की वजह से योगी आदित्यनाथ ने 22 साल की उम्र में छोड़ दिया था घर परिवार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ काजल माता खंड के एक छोटे से गांव में हुआ था. योगी आदित्यनाथ का असली नाम अजय मोहन बिष्ट है. इनका जन्म 5 जून 1972 को हुआ था योगी आदित्यनाथ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में शुरुआत से ही कार्यरत रहे. स्कूल के दिनों से है उनको हिंदुत्व के प्रति बहुत ही लगाव था. बचपन से ही वह अपने स्कूल के दिनों में वाद विवाद प्रतियोगिता में भाग लिया करते थे.

22 साल की उम्र में त्याग दिया था घर बार

विद्यार्थी परिषद में योगी आदित्यनाथ हर एक कार्यक्रम में शामिल होते थे. स्कूल पूरा कर लेने के बाद उन्होंने गढ़वाल विश्वविद्यालय में गणित से बीएससी की पढ़ाई की भी अपने कॉलेज में हर दिन सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेते थे.स्कूल और कॉलेज की पढ़ाई करने के बाद वह 22 साल की उम्र में अपने घर को छोड़कर चले गए.

प्रतियोगिता में तत्कालीन गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ को मुख्य अतिथि के रुप में बुलाया जाता था. वहीं से उन्होंने योगी आदित्यनाथ को प्रभावित किया, योगी आदित्यनाथ ने उनका भाषण सुना और उन्हें अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया.

गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ जी से हुए थे प्रभावित

तत्कालीन गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ जी उत्तराखंड के ही रहने वाले थे. उनका गांव योगी आदित्यनाथ के गांव से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर था. महंत जी कई तरह के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में बुलाए जाते थे. एक कार्यक्रम में उन्होंने योगी आदित्यनाथ का भाषण सुना.

उस भाषण से महंत जी अत्यधिक प्रभावित हुए, उन्होंने योगी आदित्यनाथ को बुलाकर उनसे पूछा कि कहां रहते हो? तुम कहां से आए हो? योगी आदित्यनाथ ने उनको अपने बारे में सारी जानकारी दी और काफी देर तक बातचीत हुई.

आखिरकार अवैध नाथ ने योगी आदित्यनाथ को गोरखपुर आने का बुलावा भेजा. न्यौता मिलने पर योगी आदित्यनाथ गोरखपुर पहुंच गए और वहां पर कुछ दिन बिताने के बाद वह अपने गांव लौट कर वापस आ गए.

महंत जी ने राम जन्मभूमि पर मंदिर बनने की लड़ाई के बारे में दी थी जानकारी

योगी आदित्यनाथ ने ऋषिकेश में ललित मोहन शर्मा महाविद्यालय में एडमिशन लिया लेकिन उनका मन पढ़ाई में नहीं लगा और वह गोरखपुर की तपस्थली की ओर चल दिए. महंत अवैद्यनाथ जी के बीमार पड़ने की खबर सुनकर वह वापस गोरखपुर पहुंचे.

गोरखपुर पहुंचने के बाद जब वह महंत जी के पास पहुंचे तो, उन्होंने आदित्यनाथ को बताया कि हम लोग अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर बनाने के लिए लड़ाई कर रहे हैं, मेरी हालत बहुत खराब हो गई है.

अगर हम नहीं रहे तो, इस राम मंदिर को देखने और मंदिर बनवाने के लिए कोई भी नहीं है. उनकी बात सुनकर योगी आदित्यनाथ काफी भावुक हो गए और उन्होंने धीरज बनाते हुए कहा कि, ”आप चिंता ना करें, आपको कुछ नहीं होगा मैं जल्द ही गोरखपुर फिर से आऊंगा”.

 

नौकरी का बहाना करके निकले थे तपस्थली की ओर

योगी आदित्यनाथ ने अपने घर पर नौकरी का बहाना बनाया और वहां गोरखपुर में तपस्थली की ओर चल पड़े. वहां पर उन्होंने महंत अवैद्यनाथ की शरण ली और उनके साथ रहने लगे. महंत जी का उत्तराधिकारी बनने के बाद योगी आदित्यनाथ वापस अपने गांव कभी नहीं गए. वह गोरखपुर में ही रहने लगे और महंत जी की सेवा में लीन हो गए. उसी समय योगी महंत अवैद्यनाथ जी ने साल 1998 में राजनीति से संन्यास ले ले लिया था.

26 साल की उम्र में बन गए थे लोकसभा सांसद

महंत जी के संन्यास लेने के बाद योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक जीवन शुरू हो गया और वह गोरखपुर से प्रसिद्ध मंदिर के महंत बन गए. 1998 में सिर्फ 26 साल की उम्र में वह लोकसभा चुनाव जीतकर वहां के सांसद बन गए. गोरखपुर से लगातार पांच बार सांसद रहे लेकिन 2016 में जब होने उत्तर प्रदेश का सीएम बनाया गया तो उन्होंने सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया.

आज वह उत्तर प्रदेश के लोकप्रिय सीएम बन चुके हैं. सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे भारत में योगी आदित्यनाथ को चाहने वाले लाखों लोग हैं. वह बीजेपी पार्टी के एक बहुत ही बड़े नेता हैं.