Covid-19

भारत में COVID-19 के बड़ रहे कहर से रोजाना हो रही मौतों के असली आंकड़ो को लेकर हर किसी के मन में एक ही सवाल खड़ा हो रहा है. कि ‘क्या मौतों की असल संख्या छुपाई जा रही है’? जिसके पीछें लोग साफ तौर पर भारतीय सरकारों पर निशाना साध रहे हैं. खैर इन सवालों की पुख्ता जानकारी तो तभी मिल गई थी जब हाल ही में आई एक रिपोर्ट मुताबिक पता चला था कि पिछले कुछ वक्त में, कब्रिस्तानों और श्मशान घाटों पर कोरोना वायरस के चलते हुईं मौतों की ‘असली संख्या’ सरकारी आंकड़ों से बहुत ज्यादा है.

तो आईए एक बार सरकारी आंकड़े और असली आंकड़ों के बीच आने वाले अंतर को देखते हैं, जिससे भारतीय सरकारों पर उठ रहे इन सवालों की आसानी से पुष्टि हो सकेगी और साथ ही हमें COVID-19 से हो रही मौतों के कुछ हदतक असली आंकड़े भी मिल सकेंगे..

इन राज्यों की सरकारो के आंकड़ों पर सवाल

Covid-19 मौतों को लेकर सरकार बोल रही है झूठ, सरकारी डेथ सर्टिफिकेट हैं सबूत, जानिए क्या हैं वास्तविक नंबर

एक अखबार एजेंसी ने हाल में ये चार ऐसे राज्यों के नामों को अपने अखबार में प्रिंट किया था. जहां कि सरकारें COVID-19 से हो रही मौतों के असली आंकड़े को लोगों और मीडिया से छुपा रहे हैं. इन राज्यों में गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश की सरकारों को खास तौर पर इस कड़ी में शामिल किया था. इसमें बताया गया था कि गुजरात के अहमदाबाद में एक बड़े श्मशान घाट पर इन दिनों लगातार लाशें जल रही हैं.

वहां के एक कर्मचारी सुरेश ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में कभी भी ऐसा होता नहीं देखा. भले ही बड़ी संख्या में लोग COVID-19 की वजह से मर रहे हैं  लेकिन जो वो मृतकों के परिवारों को पेपर स्लिप देते हैं, उनमें यह वजह नहीं लिखी होती है.

उन्होंने बताया, ”बीमारी, बीमारी, बीमारी” यह वो है, जो हम लिखते हैं. जब उनसे पूछा गया कि ऐसा क्यों है तो उन्होंने बताया कि उनके बॉस ने उनको ऐसा करने का निर्देश दिया है.

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आपको बता दें कि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक हर उस मौत को COVID-19 से संबंधित दर्ज किया जाना चाहिए जिस इंसान के लिए यह बीमारी मौत की वजह बनी हो या इसका उसमें थोड़ा बहुत भी हिस्सा रहा हो, बेशक उस व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी क्यों न हो जैसे कि कैंसर. लेकिन अगर उसमें कोरोना के थोड़े बहुत भी लक्षण पाए जाते हैं तो वो इन आंकड़ों में शामिल किया जाएगा.

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हालांकि, भारत में कई आंकड़ों में तो डेथ सर्टिफिकेट में कोरोना के बजाय कार्डिऐक अरेस्ट( हार्ट अटैक) मौत की वजह बताई जा रही है. ऐसा मामला तब सामने आया जब एक अस्पताल ने डेथ सर्टिफिकेट में मौत का कारण ”अचानक हुआ कार्डिऐक अरेस्ट” बताया, लेकिन जब मीडिया ने इस पर पड़ताल शुरू करी तब जाकर अस्पताल ने COVID-19 को भी वजह बताते हुए दूसरा डेथ सर्टिफिकेट जारी किया.