Kane Williamson : क्रिकेट की दुनिया में “फैब फोर” शब्द तब मशहूर हुआ जब विराट कोहली, स्टीव स्मिथ, जो रूट और केन विलियमसन (Kane Williamson) को एक साथ इस खास समूह में रखा गया था। इन चारों ने बीते दशक में बल्लेबाजी के हर प्रारूप में अपनी चमक बिखेरी।
लेकिन अब खुद केन विलियमसन (Kane Williamson) ने “फैब फोर” खिलाड़ियों के नाम बताए हैं-लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि उन्होंने विराट-रोहित का जिक्र नहीं किया..
Kane Williamson ने बताए फैब 4, “रो-को” का नाम नहीं…
केन विलियमसन (Kane Williamson) ने खुलकर बताया कि अगली पीढ़ी में कौन-कौन से खिलाड़ी “फैब फोर” बन सकते हैं। उन्होंने यशस्वी जायसवाल, शुभमन गिल, रचिन रवींद्र, हैरी ब्रुक और कैमरन ग्रीन जैसे खिलाड़ियों के नाम लिए। उन्होंने चौंकाते हुए रोहित-कोहली का नाम नहीं लिया।
विलियमसन के मुताबिक, ये सभी युवा खिलाड़ी तीनों प्रारूपों में अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं और भविष्य में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पर राज कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों में न सिर्फ तकनीक है, बल्कि बड़े मैचों में प्रदर्शन करने का आत्मविश्वास भी है।
यह भी पढ़ें-बिना एक भी फिल्म किए बना बॉलीवुड का सबसे अमीर खानदान, 10,000 करोड़ की संपत्ति… मालिक कभी जूस बेचता था
पुरानी पीढ़ी के फैब फोर ने रचा था इतिहास
2014 में विराट कोहली, स्टीव स्मिथ, जो रूट और केन विलियमसन को क्रिकेट की दुनिया में “फैब फोर” कहा गया था। इन चारों ने टेस्ट, वनडे और टी20 सभी प्रारूपों में शानदार प्रदर्शन किया। इनकी कप्तानी में टीमों ने आईसीसी ट्रॉफियां जीतीं और क्रिकेट को एक नई ऊंचाई दी।
लेकिन समय के साथ इनका खेल समय सीमित होता गया है और अब दुनिया की निगाहें नई पीढ़ी पर टिकी हैं। इन दिग्गजों ने धीरे-धीरे एक-एक करके किसी न किसी प्रारूप से दूरी बनानी शुरू कर दी है। अब फैंस जानने को उत्सुक हैं कि अगली फैब फोर की कुर्सी कौन संभालेगा।
फ्रैंचाइज़ी क्रिकेट की चुनौतियाँ और लाल गेंद का संकट
विलियमसन ने बताया कि नई पीढ़ी को टी20 लीग्स की एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, इसके चलते घरेलू और टेस्ट क्रिकेट को प्राथमिकता देना मुश्किल हो गया है। जायसवाल, गिल और ब्रूक जैसे खिलाड़ी संतुलन बनाने में मदद कर सकते हैं।
विलियमसन ने अपनी बात में टेस्ट क्रिकेट की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि मैं लाल गेंद क्रिकेट के युग में बड़ा हुआ।” उनके अनुसार, टेस्ट मैच खिलाड़ी की एकाग्रता, धैर्य और तकनीकी कौशल की असली परीक्षा है।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि सफेद गेंद के क्रिकेट में आपको ऐसी गहराई से चुनौतियाँ नहीं मिलतीं। लाल गेंद क्रिकेट एक ऐसा मंच है जो खिलाड़ी की कमज़ोरियों को सामने लाता है और उसे बेहतर बनने के लिए मजबूर करता है।
यह भी पढ़ें-टीम इंडिया से बाहर हुए सालों बीत गए, अब नहीं मिलेगी वापसी! इस खिलाड़ी को कर देना चाहिए रिटायरमेंट का ऐलान