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पाई-पाई के लिए मोहताज हुआ भारत का पूर्व कोच, बेटी ने कैंसर के इलाज के लिए मांगी मदद

Pai-Pai Ke Liye Mohtaj Hua Bharat Ka Purv Coach, Beti Ne Cancer Ke Ilaz Ke Liye Mangi Madd
pai-pai ke liye mohtaj hua bharat ka purv Coach, beti ne cancer ke ilaz ke liye mangi madd

Coach: कभी भारतीय टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले एक कोच (Coach) आज जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है। मैदान पर खिलाड़ियों को जीत का मंत्र देने वाला यह दिग्गज अब खुद इलाज के लिए दूसरों की मदद का मोहताज हो चुका है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि उसकी बेटी को अपने पिता के कैंसर इलाज के लिए सार्वजनिक तौर पर आर्थिक सहायता की अपील करनी पड़ी है। यह कहानी खेल जगत की उस कड़वी सच्चाई को उजागर करती है, जहां गौरवशाली अतीत के बावजूद वर्तमान बेहद दर्दनाक हो सकता है।

कैंसर की जंग से लड़ रहा ये Coach

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दरअसल, ऑस्ट्रेलिया के पूर्व हॉकी खिलाड़ी और संन्यास के बाद भारतीय हॉकी टीम को कोचिंग (Coach) दे चुके माइकल नोब्स इन दिनों जिंदगी की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहे है। पिछले पांच सालों से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे माइकल के सामने अब इलाज का संकट खड़ा हो गया है। आर्थिक तंगी के कारण उनके पास इलाज के लिए पर्याप्त पैसे नहीं बचे, जिसके चलते परिवार को मदद की गुहार लगानी पड़ी। उनकी बेटी और खुद हॉकी खिलाड़ी कैटलिन नोब्स ने पिता के इलाज के लिए सामने आकर अपनी बात रखी है, जिसने खेल जगत को भावुक कर दिया है।

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फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहे Coach

एक क्राउडफंडिंग पोर्टल के मुताबिक माइकल नोब्स (Coach) फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित हैं, जो अब उनकी हड्डियों तक फैल चुका है। कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए उन्हें एमीवेंटामैब नाम की विशेष दवा की जरूरत है, जिसकी कीमत बेहद ज्यादा है। बताया गया है कि इस दवा से छह महीने तक चलने वाले इलाज पर करीब 64 हजार ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का खर्च आता है, जो उनके परिवार के लिए जुटा पाना आसान नहीं है।

इसी वजह से कैटलिन और उनकी बहन जैमी ने 31 अगस्त 2025 को पिता के इलाज के लिए एक क्राउडफंडिंग पोर्टल पर मदद मांगी, जिससे करीब 75 हजार डॉलर जुटाए गए। इसके बावजूद इलाज पूरी तरह सुचारु नहीं हो पा रहा है। इस बारे में कैटलिन ने मीडिया से कहा, “वह सिडनी में रहते हैं और हम पर्थ में। वहां पहुंचने में फ्लाइट से कम से कम पांच घंटे लगते हैं, ऐसे में दूर से मदद करना काफी मुश्किल हो रहा है.”

बेटी ने मांगी मदद

एक इंटरव्यू में कैटलिन नोब्स ने अपने पिता (Coach) के जज्बे और संघर्ष को लेकर भावुक बातें शेयर कीं, उन्होंने कहा, “फिलहाल उनका इलाज जारी है, जो चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन वे इससे उबर रहे हैं और उनमें जीने की प्रबल इच्छाशक्ति है। इस समय उनका पूरा ध्यान खुद को ठीक करने पर है। मैं बस यही चाहती हूं कि वे मुझे हॉकी खेलते हुए देखें, क्योंकि उन्हें इसमें बहुत आनंद मिलता है और इससे उनके चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. फिलहाल मैं उनके लिए बस इतना ही कर सकती हूं।”

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Kamakhya Reley is a journalist with 3 years of experience covering politics, entertainment, and sports. She is currently writes for HindNow website, delivering sharp and engaging stories that connect with...