Jaguar Plane Crash : भारतीय वायुसेना (Jaguar Plane Crash) का जगुआर लड़ाकू विमान बुधवार रात गुजरात के जामनगर में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह हादसा जामनगर शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर सुवरदा गांव में रात करीब साढ़े नौ बजे हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि विमान के जमीन पर गिरते ही आग लग गई और उसके टुकड़े खेत में बिखर गए।
स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और अधिकारियों को सूचना दी। यह हादसा जामनगर शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर सुवरदा गांव में रात करीब साढ़े नौ बजे हुआ।
Jaguar Plane Crash में शहीद हुए सिद्धार्थ यादव
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि विमान (Jaguar Plane Crash) के जमीन पर गिरते ही आग लग गई और उसके टुकड़े खेत में बिखर गए। स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और अधिकारियों को सूचना दी। इस हादसे में फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव शहीद हो गए।
बड़ी बात यह रही कि शहीद होकर फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव ने कई लोगों की जान बचाई। सचिन और उनके साथी पायलट ने मिलकर विमान को आबादी वाले इलाके से दूर खुले मैदान में उतारा।
23 मार्च को ही हुई थी शहीद सिद्धार्थ की सगाई
सिद्धार्थ के परिजनों और स्थानीय लोगों के अनुसार सिद्धार्थ की 23 मार्च को सगाई हुई थी और 31 मार्च को वह छुट्टी पूरी कर जामनगर एयरफोर्स स्टेशन पहुंचा था। 23 मार्च 2025 को सिद्धार्थ छुट्टी पर रेवाड़ी आया था। इस दौरान उसकी सगाई हो गई।
वह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। सगाई के बाद पूरा परिवार इकलौते बेटे की शादी की तैयारियों में जुट गया। सगाई के बाद सिद्धार्थ 31 मार्च को ड्यूटी पर वापस आ गया था।
सिद्धार्थ की 2 नवंबर को होनी थी शादी
इसके दो दिन बाद ही 2 अप्रैल को जगुआर लड़ाकू विमान क्रैश (Jaguar Plane Crash) होने की खबर आई और सिद्धार्थ शहीद हो गया। 23 मार्च 2025 को सिद्धार्थ छुट्टी पर रेवाड़ी आया था। इस दौरान उसकी सगाई हो गई। वह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था।
सगाई के बाद पूरा परिवार इकलौते बेटे की शादी की तैयारियों में जुट गया। 2 नवंबर 2025 को शादी की तारीख तय हुई थी। सगाई के बाद सिद्धार्थ 31 मार्च को ड्यूटी पर लौट आए। वह वायुसेना में (Jaguar Plane Crash) फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पद पर तैनात थे।
सिद्धार्थ ही नहीं पिता-दादा भी रहे सेना में कार्यरत
सिद्धार्थ यादव का परिवार लंबे समय से सेना में देश की सेवा कर रहा है। उनके परदादा ब्रिटिश शासन के दौरान बंगाल इंजीनियर्स में थे। उनके दादा अर्धसैनिक बलों में थे और उनके पिता भी एलआईसी में शामिल होने से पहले भारतीय वायुसेना में सेवा दे चुके थे।
सिद्धार्थ देश की सेवा करने वाले अपने परिवार की चौथी पीढ़ी थे। सिद्धार्थ ने 2016 में एनडीए की परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने तीन साल की कड़ी ट्रेनिंग ली और फिर वह फाइटर पायलट (Jaguar Plane Crash) बन गए।
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