रूसी कोरोना की वैक्सीन पर भारत आएगी अगर वो...
//

क्या रूस की वैक्सीन खरीदेगा भारत? एम्स डायरेक्टर ने बताईं दो शर्तें

कोरोनावायरस के इस दौर में भारत बुरी तरह से अस्त व्यस्त हो गया है। दूसरी तरफ भारत के लिए हमेशा सही दोस्ती का रुख रखने वाला रूस कोरोना की वैक्सीन बनाने का दावा कर चुका है। पूरी दुनिया के कई देश अभी रूस में बनी कोरोना की वैक्सीन पर दिलचस्पी से निगाह रख रहे हैं। भारत में भी इसको लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

रणदीप गुलेरिया ने रखी बात

कोरोना की वैक्सीन को लेकर जहां पूरी दुनिया की तरह भारत में भी लगातार ट्रायल किए जा रहे हैं। तो वहीं रूस में बनी कोरोना की वैक्सीन को लेकर अब एम्स के प्रमुख रणदीप गुलेरिया ने एक बड़ा बयान देते हुए इसके भारत आने पर कुछ कुछ मुख्य बिंदु रखे हैं, जिनके आधार पर भारत देश कोरोना की वैक्सीन को मंजूरी दे सकता है।

ध्यान रखने की दो बातें

रणदीप गुलेरिया ने रूसी कोरोना की वैक्सीन को लेकर कहा हमें निश्चित करना होगा कि रूस में बनी इस वैक्सीन के किसी भी प्रकार के साइड इफेक्ट्स तो नहीं है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि इस बात की विशेष जांच होनी चाहिए कि यह वैक्सीन कोरोनावायरस से लड़ने वाली इम्यूनिटी को और अधिक बढ़ाता है या नहीं। हिंदू मुद्दों के बाद भारत में इसके आने की मंजूरी मिल सकती है। गुलेरिया ने कहा,

“हमें देखना पड़ेगा कि रूसी वैक्सीन सेफ और इफेक्टिव हो। सेफ का मतलब कि उससे कोई साइड इफेक्ट नहीं हो और इफेक्टिव का मतलब कि वैक्सीन इम्युनिटी को बढ़ाती हो। अगर ये दोनों चीजें आती हैं तो बड़ा कदम होगा।”

#WATCH: If Russia’s vaccine is successful, then we will have to see critically whether it is safe and effective… India has the capacity for mass production of vaccine: AIIMS Director Randeep Guleria on Russia claiming to have developed vaccine for #COVID19 pic.twitter.com/4LDkXPyLGx

जल्द हो सकता है ट्रायल

एक तरफ जहां पूरी दुनिया में रूस में बनी कोरोना की वैक्सीन पर असमंजस है तो वहीं भारतीय डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने साफ कहा है कि अगर ये कोरोना वैक्सीन मेरे बताए दो मुद्दों पर खरी उतरती है तो भारत में इसके प्रोडक्शन को बहुत तेजी मिलेगी जिसके चलते इसका ट्रायल बड़े स्तर पर आसानी से हो सकेगा और इसकी सफलता के परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने कहा,

“भारत के पास यह क्षमता है कि वह इसका बडे़ पैमाने पर उत्पादन कर पाए। उससे वैक्सीन ट्रायल और प्रभावकारी होगी और यह जल्दी आ जाएगी।”