सरबजीत की बहन दलजीत कौर का हुआ निधन, Randeep Hooda ने निभाई अंतिम संस्कार की रस्में
सरबजीत की बहन दलजीत कौर का हुआ निधन, Randeep Hooda ने निभाई अंतिम संस्कार की रस्में

बॉलीवुड फिल्म ‘सरबजीत’ ने लोगों के बीच खूब सुर्खियां बटोरी थी। इस फिल्म ने हर किसी की आंखों को नम कर दिया था। फिल्म में सरबजीत सिंह के किरदार में रणदीप हुड्डा (Randeep Hooda) दिखाई दिए थे और दलबीर कौर के रोल में ऐश्वर्या राय नजर आई थी।

हाल ही में इस फिल्म के जुड़े एक किरदार के बारे में दुखभरी खबर सामने आ रही हैं। जिसे सुनने के बाद हर कोई अपने आंसू नहीं रोक पा रहा हैं।

Randeep Hooda ने किया दलबीर कौर का अंतिम संस्कार

दरअसल फिल्म ‘सरबजीत’ में अपनी पूरी जिंदगी अपने भाई के नाम न्यौछावर करने वाली बहन दलबीर कौर का निधन हो गया हैं। उन्होंने अपनी उम्र के 60 साल में अपनी आखिरी सांस ली हैं। बहन दलबीर कौर का अंतिम संस्कार बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा (Randeep Hooda) ने किया हैं।

रणदीप हुड्डा ने शेयर किया भावुक पोस्ट

जानकारी के अनुसार दलबीर कौर के निधन पर बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा (Randeep Hooda) पंजाब के तरनतारन के गांव भिखीविंड पहुंचे हैं। उन्होंने दलबीर कौर के शव को कंधा दिया हैं। उन्होंने इस दौरान की बेहद भावुक तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की हैं। रणदीप सरबजीत की बहन दलबीर कौर को अपनी बहन का दर्जा देते थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा है कि,

बहन दलबीर ने कहा था घर जरूर आना, उन्होंने आखिरी बात कही थी।  मैं गया बस वह चली गई थीं। कोई सपने में भी सोच नहीं सकता था कि दलबीर कौर जी हमें इतनी जल्दी छोड़कर चली जाएंगी। एक फाइटर, बच्चे की तरह, तेज और हर चीज के प्रति समर्पित। उन्होंने अपने प्यारे भाई सरबजीत को बचाने की कोशिश के लिए एक व्यवस्था, एक देश, लोगों से और खुद से लड़ाई लड़ी।’

रणदीप हुड्डा ने कही भावुक बातें

सरबजीत की बहन दलजीत कौर का हुआ निधन, इस एक्टर ने निभाई अंतिम संस्कार की रस्में
सरबजीत की बहन दलजीत कौर का हुआ निधन, इस एक्टर ने निभाई अंतिम संस्कार की रस्में

रणदीप हुड्डा (Randeep Hooda) ने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि,

मैं बहुत किस्मत वाला था कि उनका प्यार मुझे मिला और आशीर्वाद मिला। इस जिंदगी में राखी को याद करूंगा।  विडंबना यह है कि जब हम आखिरी बार मिले थे, मैं उस समय पंजाब के खेतों में शूटिंग कर रहा था जहां हमने भारत-पाक सीमा बनाई थी। नवंबर की देर रात ठंड और कोहरा था लेकिन उन्हें इस सब की परवाह नहीं थी। वह खुश थीं कि हम सीमा के एक ही तरफ थे। “खुश  रहो, जुग जुग जियो” वह अक्सर अपनी बातचीत इसके साथ समाप्त करती थीं। मैं वास्तव में धन्य महसूस करता हूं। दलबीर जी के पास समय नहीं था। आई लव यू, आई मिस यू और मैं हमेशा आपके प्यार और आशीर्वाद को संजोकर रखूंगा। ‘