चीन के कपटी चाल की वजह से हो सकता है तीसरा विश्व युद्ध, भारत के बाद अब इन देशों से भिड़ा

चीन के कपटी चाल की वजह से हो सकता है तीसरा विश्व युद्ध, भारत के बाद अब इन देशों से भिड़ा

आजकल चीन के चलते कई देशों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, अब भारत के बाद चीन, जापान से भीड़ गया है. इस वजह से चीन के चलते एशिया महाद्वीप में कभी भी युद्ध हो सकता है, अभी हाल ही में जानकारी के मुताबिक लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच हुए हिंसक से काफी सैनिकों ने बलिदान दे दिया, अपने देश की रक्षा करते हुए हमारे देश के सैनिक दिन-रात एक करके चीनी सैनिको को जवाब दे रहे हैं, जिससे भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने है वर्तमान समय में पूरे एशिया में यह जगह सैन्य फ्लैश प्वाइंट बना हुआ है.

वहीं सैन्य विशेषज्ञों ने आशंका जताते हुए कहा है कि पूरी दुनिया पर शासन करते हुए सपना देखने वाला चीन अब पूर्वी सागर मे जापान के साथ द्वीपों को लेकर उलझ सकता है.

जैसे कि हम जानते हैं कि, चीन कोरोना जैसे महामारी के बीच अपने षडयंत्रों से बाज नही आ रहा है. देश कोरोना से जूझ रहा है और चीन दुनिया के कई हिस्सो पर कब्जा करने के बारे में सोच रहा है, निर्जन द्विपो पर चीन और जापान दोनों ही अपना दावा करते हैं, निर्जन द्विप को जापान में सेनकाकु और चीन में डियाओस के नाम से जाना जाता है.

1972 से ही इन द्वीपो पर जापान का प्रशासन है और वहीं चीन इस द्वीप को अपना बताते हुए जापान को यह द्वीप छोड़ देने का सुझाव देता है, और साथ ही साथ चीन की कम्युनिस्ट की पार्टी इस पर कब्जे के लिए सैन्य की धमकी दे चुकी है.

मौजूद समय में इस द्वीप की रखवाली जापान की नौ सेना करती है. अभी पिछले हफ्ते ही चीन के कई जहाज इस द्वीप के नजदीक पहुंच गया जिससे टकराव के आसार नजर आने लगे थे.

तीसरा विश्व युद्ध होने की सम्भावना

1951 में जापान और अमेरिका के बीच सेन फ्रांसिस्को संधि के तहत जापान की रक्षा की जिम्मेदारी अमरीका का है, जिससे अगर चीन जापान पर हमला करता है, तो चीन को जापान के साथ ही साथ अमेरिका से युद्ध की तैयारी करनी पड़ेगी.उल्टा अगर अमेरिका और जापान चीन पर हमला करते हैं, तो यह तीसरा विश्वयुद्ध कहलाएगा.

जापान के मुख्य सचिव कैबिनेट सचिव योशीहिदे सुगा ने कहा है कि सेनकाकू द्वीप निर्वीवाद रुप से ऐतिहासिक और अंतर्राष्ट्रीय के तहत ये हमारा है. वहीं पलटवार में चीन ने जवाब देते हुए कहा है कि डियाओस और उससे लगे हुए अन्य द्वीप चीन का हिस्सा है, जिससे इस पर हमारा हक़ है कि हम वहाँ द्वीपों के पास पेट्रोलियम और चीनी कानूनों को लागू करेंगे.

 

 

 

 

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