अपने साथी सैनिकों को बचाने में शहीद हुए नायक सचिन मोरे, चीनी सैनिकों से हुई थी झड़प

अपने साथी सैनिकों को बचाने में शहीद हुए नायक सचिन मोरे, चीनी फ़ौज को अकेले कर रखा था परेशान

अपने दो जवानों की जान बचाने में घायल‌ हुए सचिन मोरे चीनी सैनिकों ‌की 15 जून की झड़प में शहीद सो गए थे जिसके बाद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

भारत चीन विवाद में हमारे अब तक 20 जवान शहीद हो चुके हैं, वहीं अब एक और शहादत की खबर आ रही है, जो कि लोगों को हतप्रभ करने वाली है. ये खबर है पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर तैनान नायक सचिन मोरे की… जो दुश्मन से लड़ाई में शहादत दे चुके हैं। ये दर्दनाक खबर पहले से ही चीन के खिलाफ खौले हुए खून‌‌ में उबाल ला रही है।

साथियों को बचाने की कोशिश

महाराष्ट्र के नासिक में रहने वाले शहीद नायक सचिन मोरे गलवान नदी में फंसे अपने दो साथी सैनिकों को बचाने में शहीद हो गए। शहीद सचिन मोरे की ये कहानी लोगों में गर्व का अनुभव ला रही है, कोई जवान दूसरो साथी को बचाने में खुद शहादत दे गया। उनकेे परिवार को भी सेना के अधिकारियों द्वारा खबर दी गई है कि उनका लाल देश की मिट्टी के लिए शहीद हो गया है।

15 जनू को‌ हुई थी झड़प

दरअसल 15 जून को भारत और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। जिसका कारण चीनी सैनिकों द्वारा भारत के गलवान घाटी क्षेत्र में पोस्ट बनाना था। भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों को पोस्ट नष्ट करने का आदेश दिया, लेकिन जब कर्नल संतोष बाबू वहां पहुंचे तो चीनी सैनिकों ने उन्हें हिंसक झड़प में शहीद कर दिया अपने कर्नल को शहीद होता देख भारतीय सैनिकों का गुस्सा उबाल मारने लगा और‌ दोनों देशों के सैनिकों की भीषण झड़प में भारत के 20‌ जवान शहीद हुए।

शहीद नायक सचिन मोरे के‌ इस सर्वोच्च बलिदान पर सभी को गर्व है। इस मौक़े पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने ट्वीट करते हुए अपना दुख ज़ाहिर करते हुए शहीद के परिवार को सांत्वना दी।  इस मौक़े पर महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने भी शहीद को श्रद्धांजलि देते हुए संवेदनाएं प्रकट की।

बन गया गलवान नदी पर पुल

चीन अपनी ओर हर तरह के निर्माण करता रहता है, लेकिन जब भारत अपनी सीमा में कोई निर्माण करता है चीन की ये आक्रामकता गलवान नदी पर भारत द्वारा बनाया गया पुल है जो कि चीन के लिए खतरा है।

टॉप ऑफिसर्स के मुताबिक साथ ही पुल के बन जाने से सेना अब 255 किलोमीटर लंबी रणनीतिक रोड जो दारबुक से दौलत बेग ओल्‍डी तक जाती है, उसकी सुरक्षा भी हो सकेगी। दौलत बेग ओल्‍डी में भारत की आखिरी पोस्‍ट है और यह काराकोराम पास के दक्षिण में पड़ती है।

इस पुल को सेना के फॉर्मेशन इंजीनियरों ने तैयार किया है और इंजीनियरों ने चीन की परवाह न करते हुए इस पुल का काम पूरा किया है और अब तेजी से जाने के लिए हमारी पहुंच सीमा पर अधिक हो गई है।

 

 

 

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