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High Court : दिल्ली हाईकोर्ट (High Court) के जज पर ही पेचीदा आरोप लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के बंगले पर कई नोट मिले है। इससे उन पर मुसीबत आन पड़ी है। सूत्रों के मुताबिक उनके सरकारी बंगले में भारी मात्रा में नकदी मिली थी। इसके बाद कॉलेजियम ने यशवंत वर्मा के तबादले का फैसला लिया है। पूरा मामला एक हफ्ते पहले शुरू हुआ था।

होली की छुट्टियों के दौरान सरकारी बंगले में आग लग गई थी। जब फायर ब्रिगेड आग बुझाने पहुंची तो सरकारी बंगले में करोड़ों रुपये की नकदी मिली थी।

justice yashwant varma delhi high court के घर मिला नोटों का खजाना

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बहरहाल जज यशवंत वर्मा के तबादले को लेकर कॉलेजियम ने फैसला ले लिया है। दिल्ली हाईकोर्ट (High Court) के जज यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले में आग लग गई। वह घर पर नहीं थे। ऐसे में परिवार ने तुरंत फायर ब्रिगेड और पुलिस को बुलाया। आग पर काबू पाने के दौरान फायर ब्रिगेड कर्मियों ने बंगले के अंदर नोटों का बड़ा ढेर देखा। इसके बाद यह मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा और फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

जस्टिस यशवंत वर्मा का तत्काल तबादला

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जब भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना को इस बारे में पता चला तो उन्होंने तुरंत कॉलेजियम की बैठक बुलाई और जस्टिस (High Court) यशवंत वर्मा का दिल्ली हाई कोर्ट (High Court) से इलाहाबाद हाई कोर्ट में तबादला कर दिया। जस्टिस वर्मा पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट में तैनात थे।

संभव है कि अगर जस्टिस यशवंत वर्मा जांच में खुद को बचाने में असमर्थ रहे तो उनसे इस्तीफा मांगा जा सकता है। अगर वह इस्तीफा नहीं देते हैं तो संसद में उनके खिलाफ महाभियोग लाया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट कर सकता है जज पर कार्रवाई

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आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट (High Court) के जज को महाभियोग लाकर ही पद से हटाने का प्रावधान है। जस्टिस यशवंत वर्मा को पद से हटाए जाने के बाद उनके खिलाफ अन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने जजों को लेकर बनाया है प्रावधान

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कोर्ट (High Court) ने न्यायाधीशों के खिलाफ भ्रष्टाचार और गलत कामों के आरोपों से निपटने के लिए 1999 में एक आंतरिक प्रक्रिया तैयार की थी। इसके अनुसार शिकायत मिलने पर मुख्य न्यायाधीश संबंधित न्यायाधीश से जवाब मांगेंगे। अगर जवाब संतोषजनक नहीं है। तो मामले की जांच के लिए एक आंतरिक जांच समिति बनाई जाएगी।

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