विज्ञान और वैज्ञानिक भी नहीं लगा सके भीम कुंड की गहराई का पता, प्राकृतिक आपदा से पहले दे देता है संकेत

जहां अब तक तमाम बड़े वैज्ञानिक और देश किसी भी प्राकृतिक आपदा अथवा भूकंप आने के पहले संकेत देने का किसी भी तरह का यंत्र इजाद नहीं कर पाए हैं। वहीं, देश में एक ऐसी जगह है जहां स्थित एक कुंड किसी भी तरह की प्राकृतिक आपदा आने से पहले ही लोगों को सचेत कर देता है। मगर इसका रहस्य अभी भी बरकरार है। तमाम देशों के वैज्ञानिक और शोधकर्ता यहां तक कि डिस्कवरी चैनल भी इसके रहस्य को जानने का भरसक प्रयास कर चुका है। लेकिन अभी तक कोई सफलता उनके हाथ नहीं लगी।

तो आइए जानते है उस कुंड के बारे में…………….

चमत्कारिक गुणों से भरा है यह कुंड………

विज्ञान और वैज्ञानिक भी नहीं लगा सके भीम कुंड की गहराई का पता, प्राकृतिक आपदा से पहले दे देता है संकेत

एमपी में जबलपुर का एक इलाका है जिसे भूकंप के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जाता है. जिसकी वजह से यहां आस पास के इलाकों में भूकंप के झटके अक्सर महसूस किए जाते रहते हैं। 1997 में यहां आए भूकंप को इलाकाई लोग शायद ही कभी भूल पायें। अब तक भूकंप के झटकों को देखेते हुए कई वैज्ञानिक भूकंप संकेती यंत्रों के निर्माण का दावा कर चुके हैं.

हालाँकि अभी तक ऐसा कोई परिणाम सामने नहीं आया है कि देश के किसी भी स्थान पर भूकंप के झटके महसूस होने से पहले ही उसके आने की जानकारी लोगों तक पहुंच जाए, लेकिन मध्यप्रदेश में एक ऐसा कुंड है जो देखने में एकदम साधरण सा लगता है, लेकिन इसकी विशेषता यह है कि ऐशियाई महाद्वीप में जब भी कोई प्राक्रतिक आपदा आती है तो इस कुंड का जल स्तर स्वयं ही बढ़ जाता है।

पुराणों में इसका जिक्र नील कुंड के नाम से मिलता है। जबकि लोग इसे भीम कुंड भी कहते हैं। भीम कुंड की गहराई अब तक मापी नहीं जा सकी है। कुंड के चमत्कारिक गुणों की जानकारी मिलने पर डिस्कवरी चैनल की एक टीम ने भी कई सालों पहले इसकी गहराई मापने की कोशिश की थी, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी।

विज्ञान और वैज्ञानिक भी नहीं लगा सके भीम कुंड की गहराई का पता, प्राकृतिक आपदा से पहले दे देता है संकेत

इलाकाई लोग लगा लेते हैं अनुमान….

आसपास के लोगों का ऐसा कहना है कि जब भी कोई भौगोलिक घटना घटित होने वाली होती है तो यहां का जल स्तर बढ़ने लगता है। इससे इलाकाई लोग पहले से ही किसी प्राकृतिक आपदा का अनुमान लगा लेते हैं। कुंड के आस पास रहने वाले लोग कहते हैं कि जब नेपाल और गुजरात में आया था तब भी यहां का जल स्तर बढ़ गया था। सुनामी के दौरान भी लगभग 15 फिट ऊपर इसका जल स्तर आ गया था।

…तो इसलिए कहलाया भीमकुंड

विज्ञान और वैज्ञानिक भी नहीं लगा सके भीम कुंड की गहराई का पता, प्राकृतिक आपदा से पहले दे देता है संकेत

अगर इतिहास के पन्नों में झांका जाए तो जानकारी मिलती है कि अज्ञातवास के दौरान एक बार भीम को प्यास लगी। उन्होंने पानी की बहुत तलाश की लेकिन पानी नहीं मिला। ऐसे में क्रोधित होकर भीम ने जमीन पर अपनी पूरी शक्ति से गदा पटका था। जिससे पानी निकल आया और तभी से इसे भीमकुंड कहा जाने लगा।

यह कुंड छतरपुर जिला बड़ा मल्हेरा के बाजना गांव से लगभग 30 किमी दूर सुरंभ पहाड़ियों के बीच मौजूद है। ऐसी जानकारी मिली है कि इस कुंड पर रिसर्च करने के लिए दूर-दूर से वैज्ञानिक और शोधकर्ता आते रहते हैं।

 

 

 

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