टॉपटेन अपराधियों में नंबर वन टिंकू कपाला मुठभेड़ में ढेर
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बड़ी खबर: टॉपटेन अपराधियों में नंबर वन टिंकू कपाला मुठभेड़ में ढेर

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से टॉपटेन अपराधियों की सूची में दर्ज एक लाख के ईनामी शातिर अपराधी टिंकू कपाला उर्फ कमल किशोर को शुक्रवार रात एसटीएफ ने मुठभेड़ में मार गिराया। मुठभेड़ बाराबंकी की सतरिख रोड पर हुई। टिंकू कपाला मोस्ट वांटेड अपराधी था।

उत्तर प्रदेश से लेकर महारष्ट्र और गुजरात तक वह अपराध करता था। उसके खिलाफ लूट, डकैती और हत्या समेत करीब 27 मुकदमें दर्ज हैं। वर्ष 2019 में राजधानी के कृष्णानगर इलाके में हुई आरके ज्वैलर्स के यहां डकैती के मामले में भी वह वांछित चल रहा था। डकैती में एक गार्ड समेत दो लोगों की हत्या भी कपाला गैंग ने की थी।

शातिर अपराधी टिंकू कपाला राजधानी के ही चौक थानाक्षेत्र के निवाजगंज का रहने वाला था। एसपी बाराबंकी डॉ. अरविंद चतुर्वेदी ने बताया कि शुक्रवार रात मुखबिर से पुलिस को सूचना मिली कि टिंकू कपाला और उसका गैंग किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए इलाके में बाइक से घूम रहा है।

पुलिस और एसटीएफ की टीम ने टिंकू कपाला की लोकेशन के आधार पर उसकी घेराबंदी की। घेराबंदी के दौरान टिंकू कपाला ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्यवाई में पुलिस ने फायरिंग की तो टिंकू को गोली लग गई और वह मौके पर गिर पड़ा। पुलिस टिंकू को अस्पताल लेकर पहुंची, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

नाम बदलकर अन्य जिलों में चलाता था अपना नेटवर्क

पुलिस टीम के मुताबिक टिंकू कपाला हर एक शहर और राज्य में अपना नाम बदलकर रहता था। बदले नाम से ही वह अपना नेटवर्क चलाता था। उत्तर प्रदेश के अलावा गुजरात और महाराष्ट्र तक में वह लूट, डकैती और हत्या की वारदातों को अंजाम देता था। वारदात के दौरान वह गोली मारने में कतई झिझकता नहीं था। वह तुरंत हत्या कर देता था।

राजधानी में कई बड़ी वारदातों को दे चुका है अंजाम

जानकारी के मुताबिक राजधानी में सबसे पहले बड़ी अपराधिक घटना में 1990 में टिंकू कपाला का नाम आया था। उसके बाद उसने हुसैनगंज पेट्रोल पंप लूट की वारदात को अंजाम दिया। वरीजगंज में भी पेट्रोल पंप व्यवसायी की गोली मार कर हत्या की और लाखों रुपये की लूट की थी।

हाल में ही वर्ष 2019 में लखनऊ में आरके ज्वैलर्स के यहां हुए लूटकांड में भी उसने वारदात को अंजाम दिया था। वारदात को अंजाम देकर वह अंडर ग्राउंड हो जाता था। वह एक जगह वारदात को अंजाम देने के बाद दूसरे राज्यों और नेपाल में जाकर शरण लेता था। पुलिस को लंबे समय से टिंकू कपाला की तलाश थी।

 

 

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