अब कारगिल गर्ल गुंजन सक्सेना की जांबाजी देखेगी दुनिया
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अब कारगिल गर्ल गुंजन सक्सेना की जांबाजी देखेगी दुनिया, देखें पोस्टर

आजादी की लड़ाई से लेकर देश के तमाम बड़े आंदोलनों में भारतीय नारियों का अहम रोल रहा है। रानी पद्मावती से लेकर रानी लक्ष्मी बाई और इंदिरा गांधी तक भारतीय नारियों ने हर एक मोर्चे को बखूबी संभाला है। इसी क्रम में नाम जुड़ चुका है, लखनऊ की कारगिल गर्ल गुंजन सक्सेना का।

जिन्होंने 1999 में हुए कारगिल युद्ध में दुश्मनों के खेमे में घुसकर बड़ी ही जांबाजी के साथ न केवल दुश्मनों के खेमे को नष्ट किया था, बल्कि वहां फंसे भारतीय सैनिकों की भी जान बचाई थी। गुंजन ने बतौर फाइटर पायलट रहते हुए भारतीय सेना में तमाम कीर्तिमान हासिल किए हैं।

उनकी यह कहानी अब हर व्यक्ति की जुंबा पर जीवंत होगी। क्योंकि 12 अगस्त को उन पर बनी फिल्म कारगिल गर्ल नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो रही है।

गोलीबारी के बीच 20 दिन तक उड़ाया था चीता हेलीकॉप्टर

लखनऊ के सरोजनीनगर में पली बढ़ी गुंजन सक्सेना ने 1999 में हुए कारगिल वार में अपनी जांबाजी से दुश्मनों के झक्के छुड़ा दिए थे। अदम्य साहस और वीरता का परिचय देते हुए देश की इस बेटी ने पहली बार किसी युद्ध में फाइटर प्लेन उड़ाया था।

20 दिनों तक लगातार फ्लाइंग ऑफीसर गुंजन ने विषम परिस्थितयों में दुश्मनों की भारी गोलाबारी के बीच कारगिल में चीता हेलीकॉप्टर से उड़ान भरी थी।

दुश्मनों के करीब से अपने घायल जवानों को लाई थी बचाकर

गुंजन की बहादुरी के चर्चे यूं नहीं हो रही है। युद्ध के दौरान घायल अपने जवानों को दुश्मनों के बेहद करीब से उठाकर वह हेलीपैड तक पहुंची थी। इस बीच दुश्मन लगातार गोलीबारी कर रहे थें। कई बार दुश्मनों से गुंजन का आमना सामना भी हुआ। पर जांबाज गुंजन की वीरता के आगे कोई नहीं टिका। वह अपने जवानों की जान बचाकर हेलीकॉप्टर से लेकर सुरक्षित लौटीं।

कैप्टन मनोज पांडेय यूपी सैनिक स्कूल में हुई शूटिंग

युद्ध के करीब 20 साल बाद गुंजन की बहादुरी अब पर्दे पर दिखने जा रही है। फिल्म की शूटिंग कैप्टन मनोज पांडेय यूपी सैनिक स्कूल में हुई है। स्कूल को फिल्म में एयरबेस की तरह दिखाया गया है। फ्लाइंग ऑफीसर की जांबाजी स्वतंत्रा दिवस के दो दिन पहले पर्दे पर ताजा हो उठेगी।

गुंजन के भाई का भी युद्ध कौशल दिखा था कारगिल में

गुंजन का चयन सेना में 1996 में फ्लाइंग ऑफीसर के रूप में शार्ट सर्विस कमीशंड से हुआ था। उनके भाई अंशुमान सक्सेना ने एनडीए से कमीशंड हांसिल किया था। कारिगल वार के दौरान गुंजन के भाई अंशुमान जीओसी के एडीसी थे। वह भी युद्ध के एक बड़े हिस्से की प्लानिंग कर रहे थे। गुंजन की यूनिट श्रीनगर बेस पर थी और उधमपुर से ऑपरेशन कर रहीं थीं। गुंजन को इस ऑपरेशन मे लगाने का एक और मक्सद था कि उन्हें पूरे इलाके की जानकारी थी।

दादा से लेकर पिता और पति भी देश के लिए लड़े

गुंजन का न केवल मायका बल्कि ससुराल भी देश के लिए समर्पित है। उनके दादा स्वतंत्रा संग्राम सेनानी थे। आजादी की लड़ाई में उन्होंने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे और आंदोलन में जेल भी गए। पिता एके सक्सेना सेवानिवृत्त कर्नल हैं। भाई सेना में कर्नल है।

इसके अलावा गुंजन के पति भी वायुसेना की हेलीकॉप्टर यूनिट में फ्लाइंग ऑफीसर हैं। गुंजन पर बन रही फिल्म कारगिल गर्ल को पर्दे पर देखने की हसरत उनकी मां कीर्ति सक्सेना की भी थी ,लेकिन रिलीज से पहले ही गत वर्ष आठ अक्टूबर को उनका निधन हो गया। हालांकि शूटिंग की उन्हें जानकारी थी।

 

 

 

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