Martyred Son Statue: जनवरी के महीने में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, लोग गिरते हुए पारे की वजह से कांप रहे हैं. ठंड से बचने के लिए लोग भारीभरकम कपड़े पहन रहे हैं. कोई तो जैकेट-स्वेटर पहनने के बाद भी शॉल और कंबल ओढ़ कर घर से बाहर निकल रहा है. इस महीने में ऐसा नजारा आम हो गया है. वहीं, अर्निया (जम्मू) में एक मां का अपने बेटे के लिए कलेजा फट रहा है.
दरअसल, यह कहानी जसवंत कौर की है, जो 8 साल बाद भी अपने शहीद बेटे की मूर्ति (Martyred Son Statue) का भी ध्यान रख रही है. चलिए तो आगे जानते हैं क्या है पूरा मामला?
ठंड में बेटे की शहीद मूर्ति को कंबल ओढ़ाती हैं मां
माँ का प्यार जो कभी खत्म नहीं होता… 🫡
जम्मू में ठंड बढ़ने पर सरदारनी जसवंत कौर ने अपने शहीद बेटे कॉन्स्टेबल गुरनाम सिंह की मूर्ति पर कंबल डाल दिया, गुरनाम सिंह बीएसएफ की 173वीं बटालियन में तैनात थे।
साल 2016 में उन्होंने सीमा पर आतंकियों की घुसपैठ को नाकाम किया और ड्यूटी के… pic.twitter.com/sqnikA3zHZ
— JIMMY (@Jimmyy__02) January 9, 2026
साल 2021 में अर्निया जम्मू कश्मीर में शहीद कांस्टेबल गुरनाम सिंह (Martyred Son Statue) की प्रतिमा लगाई गई थी. तब से ही जब भी ठंड का मौसम आता है तो उनकी मां जसवंत कौर उन्हें मोटा कंबल उढ़ा देती हैं. लोगों के लिए गुरनाम सिंह शहीद हो चुके हैं, लेकिन उनकी मां के लिए आज भी वह उनके लाडले बेटे हैं. जिन्हें सर्दियों में ठंड लगती है. यह नजारा देख पूरा गांव तक भावुक हो जाता है. जसवंत कौर का मानना है कि बेशक से उनका बेटा शहीद हो चुका है, लेकिन आज भी इस मूर्ति के रूप में वह जिंदा है. जिसे सर्दियों में ठंड लगती है.
जसंवत कौर के शहीद बेटे ने भारत माता के लिए गंवाई जान
जसंवत कौर को आज भी याद है, जब उनका बेटा 26 साल पहले आखिरी बार मिला था. उन्होंने उसकी शादी के सपने बुने थे. सोचा था अब बेटा जब भी दूसरी बार घर आएगा तो शहनाई बजेगी. लेकिन गुरनाम (Martyred Son Statue) के दिल में देश प्रेम इतना था कि उसने कोई और सपना देखा ही नहीं. साल 2021 अक्टूबर 2016 में शहीद कांस्टेबल गुरनाम सिंह ने हीरानगर सेक्टर में घुसपैठ करते आतंकियों को रोका था. उन्होंने एक आतंकी को भी ढेर किया था और सीजफायर का भी गोलियों के जवाब दिया था. लेकिन इस दौरान एक मां का बेटा शहीद हो गया.
BSF की 173वीं बटालियन वीर शहीद (Martyred Son Statue) हो गया है, लेकिन अपनी मां की यादों में वह आज भी जीवित है. जसवंत कौर का बलिदान याद दिलाता है कि एक जवान का परिवार खुद शहीद नहीं होता बल्कि उसका पूरा परिवार भारत माता के लिए जीता है.
सोनू सूद अपना बर्थडे भी करेंगे लोगों के नाम, देश भर में लगवा रहे फ्री कैंप
