गंगा ने बढ़ाई उत्तर प्रदेश की मुसीबत, डूब सकते हैं ये गांव

गंगा ने बढ़ाई उत्तर प्रदेश की मुसीबत, डूब सकते हैं ये गांव

कोरोना महामारी को लेकर जहाँ पूरा देश त्राहि-त्राहि कर रहा है, तो वहीं प्रयागराज से लेकर कानपुर तक व जिन-जिन शहरों से होकर गंगा गुजरी है, उसके आसपास बसे गांव वासियों के लिए गंगा ने और भी चिंता बढ़ा दी है.
दरअसल गत वर्षो की भांति इस बार भी गंगा में बाढ़ आने की वजह से हजारों गांवों के डूबने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन गत वर्षों तक राहत यह थी कि करोना  जैसी कोई महामारी नहीं थी.
इसलिए शासन और प्रशासन मिलकर सब कुछ सही कर लेता था. लेकिन अबकी कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप के साथ ही गंगा को लेकर भी लोगों मे चिंता बढ़ गई है. सबसे ज़ादा  प्रयागराजवासी इस संकट से भयभीत है.
इस बार तो मध्य जून से ही गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ने लगा है। उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मॉनसून सक्रिय होने के कारण मध्य जून से ही गंगा-यमुना में पानी बढ़ रहा है। दोनों नदियों का जलस्तर तेज़ी से बढ़ रहा है, लेकिन वर्तमान में शहर के तटीय इलाकों के लिए गंगा का बढ़ना खतरनाक संकेत दे रहा है। ऐसी संभवना है कि गंगा मे अभी से पानी बढ़ने लगा तो अगस्त-सितंबर से पहले बाढ़ आ सकती है।

बैराजों से छोड़ा जा रहा है तीन गुना पानी….

 बीते वर्षों की तुलना में इस बार  बैराजों से लगभग तीन गुना से अधिक पानी छोड़ा जा रहा है। नरोरा और कानपुर बैराजों से छोड़ा जा रहे  बारिश के पानी का प्रभाव गंगा के कछार में दिखाई पड़ने लगा है। संगम क्षेत्र में कछार के बीच से बहने वाली गंगा में छोड़ा जा रहा अतिरिक्त पानी नागवासुकि मंदिर के सामने निचले इलाकों को भरने लगा है। एक सप्ताह से गंगा का प्रवाह तेज हुआ है।

 पहले से ही गंगा मे है ज़्यादा पानी

गत वर्षो तक गंगा और यमुना में इस तरह की हलचल मध्य जुलाई के बाद दिखाई पड़ती थी, लेकिन इस बार  मध्य जून से गंगा में जलस्तर बढ़ने लगा है. इस कारण सिंचाई विभाग का बाढ़ प्रखंड अभी से सक्रिय हो गया है। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि बैराजों से छोड़ा जा रहा पानी प्रयागराज में दिखाई पड़ रहा है। सहायक अभियंता कहते हैं कि गंगा में पहले से पानी अधिक था। इस साल मॉनसून 15 जून से पहले सक्रिय होने पर बारिश ने चिंता बढ़ा दी है.

 विशेषज्ञों का यह है कहना…

उमेश शर्मा, सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता व नदी विशेषज्ञ कहते है कि
“इस साल मॉनसून ठीक समय पर सक्रिय है। जुलाई के पहले सप्ताह में कश्मीर से मॉनसून सक्रिय होगा। मॉनसून अभी से सक्रिय है तो बारिश अच्छी होगी। अभी से बारिश और गंगा-यमुना में जलस्तर बढ़ने का ट्रेंड देखकर इस साल भी बाढ़ के लिए तैयार रहना चाहिए।”

तो इस तरह तटीय मोहल्लो मे पहुंचेगा पानी….

गंगा-यमुना का जलस्तर बढ़ने पर शहर वासियों की मुश्किल कुछ इस तरह बढ़ेगी. गंगा का जलस्तर 81.15 मीटर पहुंचने के साथ स्लूज गेट बंद होने लगेंगे। सबसे पहले बक्शी बांध स्लूज गेट बंद होगा। इसके बाद मोरी और चाचर नाले का गेट बंद होने से एक तिहाई शहर के नालों का पानी रुक जाएगा।

नालों का पानी बहाने के लिए नगर निगम, जल निगम को बड़े-बड़े पंप चलाने पड़ेंगे। 81.50 मीटर जलस्तर होने पर लगभग संपूर्ण संगम क्षेत्र जलमग्न हो जाएगा।

81.70 मीटर जलस्तर पहुंचने के साथ गंगा के तटीय मोहल्लों में पानी प्रवेश करेगा। इससे पहले निचले इलाकों को खाली कराने की कवायद शुरू हो जाएगी। निचले इलाकों में पानी घुसने से लगभग 50 हजार आबादी प्रभावित होगी।

 

 

 

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