हाथरस केस के आरोपी और पीड़िता के भाई के बीच हुए थे 104 कॉल
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OMG हाथरस केस के आरोपी और पीड़िता के भाई के बीच हुए थे 90 दिन में 104 कॉल

हाथरस केस में एसआईटी द्वारा की जा रही लगातार जांच में अब नया मोड़ आ चुका है. आरोपी संदीप और पीड़िता के भाई की कॉल डिटेल सामने आई है. जिसमें पता चला है कि साल 2019 अक्टूबर से लेकर मार्च 2020 तक दोनों के बीच कई बार बातचीत हुई. जांच टीम द्वारा जब कॉल डिटेल निकलवाई गई तो पता चला कि दोनों के बीच 104 बार कॉल हुई है.

आरोपी संदीप और पीड़िता के भाई के बीच में जितनी भी बार बात हुई, उसमें से 62 कॉल संदीप को पीड़िता के भाई ने की है जबकि 42 बार फोन संदीप ने पीड़िता के भाई के पास की है. जांच पड़ताल के बाद पता चला कि जिस फोन से कॉल की गई है, वह फोन पीड़िता के भाई की पत्नी चलाती है.

यूपी पुलिस ने जब इस केस में लगातार छानबीन की तो पता चला कि, इसी फोन के द्वारा संदीप और पीड़िता के भाई के बीच बातचीत होती थी. कॉल डिटेल्स की सारी जानकारी एसआईटी की टीम जल्द ही यूपी सरकार को सौंप देगी.

आरोपियों के वकील ने किया दावा, आरोपी है निर्दोष

इन्हीं सबके बीच हाथरस कांड के आरोपियों के वकील ने एक हैरान कर देने वाला दावा किया है. उन्होंने बताया कि, ”रेप पीड़िता की हत्या उसके भाई द्वारा ही की गई है. उन्होंने बताया कि, ” इस पूरे केस में पूरा मामला राजनीतिकरण के आसपास घूम रहा है, इस केस में आरोपियों को फंसाने की साजिश की गई है.

आरोपियों को निर्दोष जानते हुए ही वह केस को लड़ रहे हैं”. हम आपको बता दें कि, ” आरोपियों के वकील एपी सिंह ने यह भी दावा किया है कि, ”इस केस में आरोपियों को जबरदस्ती घसीटा जा रहा है, जबकि सभी निर्दोष है”.

आरोपियों के वकील एपी सिंह को क्षत्रिय महासभा के द्वारा हाथरस कांड के पूरे मामले में आरोपियों के पक्ष के लिए नियुक्त किया गया है. पीड़िता के परिवार वाले इस केस में लगातार सीबीआई की मांग करने लगे हैं. उत्तर प्रदेश सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई की जांच के लिए अपील की है. इस केस में पीड़िता के परिवार वालों की सुरक्षा को लेकर भी मुद्दा उठाया गया है, जिस पर उत्तर प्रदेश सरकार ने हलफनामा तैयार करने के आदेश दे दिए हैं.

पीड़िता के अंतिम संस्कार को लेकर यूपी सरकार ने जारी किया हलफनामा

हाथरस कांड में पीड़िता का अंतिम संस्कार आधी रात को ही कर दिया गया था, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सफाई के तौर पर हर अपना हलफनामा दाखिल करवाया. यूपी सरकार की तरफ से कहा गया है कि, ” सुबह के वक्त अंतिम संस्कार करने पर भीड़ बढ़ सकती थी, और तनाव भी पैदा हो सकता था. साथ ही उस दिन बाबरी मामले का फैसला भी सामने आया था, जिसके बाद दंगे और मारपीट का भी अंदेशा था. यही कारण है कि अंतिम संस्कार रात में कर दिया गया”.

बता दें कि, पीड़िता के परिवार वालों ने आरोप लगाया था कि, उनकी बिटिया का अंतिम संस्कार उनकी जानकारी में नहीं किया गया.

 

 

 

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