जबलपुर का वो परिवार जिसने बिना एक पेड़ काटे, बना लिया अपना घर
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जबलपुर का वो परिवार जिसने बिना एक पेड़ काटे, बना लिया अपना घर

प्रकृति को बचाने की मुहिम तो हर बार छेड़ी जाती है लेकिन जंगलों में जिस तरह से पेड़ काटे जा रहे हैं वो खतरनाक है। ग्लोबल वार्मिंग से लेकर सभी तरह की आपदाओं के लिए पेड़ के कटाव और जंगलों की कमी को बड़ी वजह माना गया है। ऐसे में जब लोग द्वारा अपना घर बनाने के लिए जंगलों को काटा जा रहा है तो उस वक्त एक ऐसा परिवार भी हैं जिसने किसी भी तरह का पेड़ काटे जंगल में अपना घर बना लिया है।

बिना पेड़ काटे बनाया घर

ये कहानी जबलपुर की है जहां एक शख्स ने जंगल में ही अपना घर बनाया है। बड़ी बात ये है कि इस घर के निर्माण में एक भी पेड़ नहीं काटा गया है। इसके चलते इस घर रहने वाले योगेश केसरवानी के परिवार को पूरे जबलपुर में सम्माननीय माना जाता है। बड़ी बात ये भी है कि इस घर में 150 साल पुराना एक पीपल का पेड़ भी है और सही सलामत फल-फूल भी रहा है।

लोगों ने उड़ाया था मजाक

आपको बता दें कि उस वक्त 100 साल से ज्यादा पुराने इस पेड़ के आस पास घर बनाने में इंजीनियर्स को लगभग-लगभग एक साल का लंबा वक्त लगा था। ये एक दो मंजिला घर है। योगेश ने बताया की जब ये मकान बना था तो लोग उनका घर देखने आते थे फिर मजाक उड़ाते थे कि इतनी जगह में तो और भी अच्छा घर बन सकता है लेकिन घर में पेड़ के कारण ये नहीं हो‌ पाया।

पेड़ से विशेष लगाव

योगेश भी पेड़ों के प्रति एक विशेष लगाव रखते थे जिसके चलते उन्होंने कहा कि दस पुत्रों के बराबर एक पेड़ होता है। उनका मतलब था कि जितना सुख 10 पुत्र एक जीवन में दे सकते हैं उतना सुख एक अकेला पेड़ ही दे सकता है उनका ये बयान प्रकृति के प्रति उनके और उनके परिवार के लगाव को प्रतिबिंबित करता है। योगेश ने बताया कि उनकी मां इस पीपल के पेड़ की प्रतिदिन पूजा करतीं थी और अब इस काम को उनकी पत्नी आगे बढ़ा रहीं हैं।

इस तरह के घरों को बनाना नायाब इंजीनियरिंग से कम नहीं होता है, जिसमें बहुत अधिक दिमाग लगता है और इस घर में कई पेड़ हैं। लेकिन बड़ी बात ये है कि इन पेड़ों की कोई भी डाल ऐसी‌ नहीं है जो योगेश या किसी का भी मार्ग रोकें। पीपल के पेड़ से घर का वातावरण भी अधिक शुद्ध रहता है। इंजीनियरिंग का ये ऐसा नमूना है कि कॉलेज के छात्र इस पर अध्ययन के लिए यहां आते रहते हैं।

कब बना था ये मकान

जबलपुर में बिना पेड़ काटे ये घर 1994 बनाया गया था। गौरतलब है कि ये घर योगेश केसरवानी के पिता ने बनवाया था। इस घर को बनाने वाले इंजीनियर लगातार योगेश के पिता से ये कहते रहे कि अगर ये पीपल का पेड़ हट गया तो घर के लिए काफ़ी जगह हो जाएगी और गार्डन भी अच्छा बनेगा।

उन्होंने इस पेड़ को नहीं काटने दिया जिसके चलते उनके इस मकान में काम करने के लिए कोई तैयार ही नहीं था बड़ी मुश्किल में एक इंजीनियर ने मकान बनाने का काम लिया लेकिन पेड़ नहीं कटने दिया जो कि अपने आप में एक सराहनीय बात थी यहीं कारण है कि उनका उस पूरे इलाके में अधिक सम्मान है।

 

 

 

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