जौनपुर :रक्षक से भक्षक बनी पुलिस, गरीबों से ऐंठे जा रहे पैसे
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जौनपुर : पुलिस बनी रक्षक से भक्षक, गरीब और असहाय लोगों से ऐंठे जा रहे पैसे

मुंगराबादशाहपुर (जौनपुर) जी हां, ये सच है हम बात कर रहें हैं उत्तर प्रदेश पुलिस की जो आए दिन गरीबों पर अत्याचार, शोषण, और प्रताड़ित करने के लिए जाना जाता है कहीं पर जमीन कब्जा कराने के लिए कहीं पर एफआईआर दर्ज कराने आए लोगों पर तो कहीं पर मनमानी चालान काटने के लिए मशहूर है।

पैसों की किल्लत से जूझ रहा देश

देश भर में जहां दो महीने से अधिक लॉकडाउन के दौरान सभी दुकान, बाजार, मॉल, स्कूल कॉलेज बंद रहा है, जिससे बाजार में मंदी रहा और लोग पैसे की किल्लत से जूझते रहे हैं, जब अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हुई और धीरे धीरे दुकान खुलना शुरू हुआ, जिससे लोगों में कुछ उम्मीद जगी की अब कुछ कमाई शुरू होगी पर कोरोना के कारण बाजारों में भी इसका खासा प्रभाव देखने को मिला जहां जनता पैसे की किल्लत से जूझ रहा है कहीं किसी का रोजगार छीन गया तो कोई जैसे तैसे जो कुछ कमाई हो रहा है उसी से परिवार और अपना भरणपोषण कर रहें हैं।

रक्षक बनी है भक्षक

वहीं जनता उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शनिवार और रविवार को लॉकडाउन लागू किया गया है, जिसमे आवश्यक व एमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर सभी दुकान बंद रखने का आदेश जारी किया और मोटर साईकल सवार को हेलमेट, फेस मास्क, न पहनने पर भारी भरकम जुर्माना लगाया गया है, जिसकी आड़ में पुलिस प्रशासन जमकर कमाई कर रहा है। लॉकडाउन के दौरान पुलिस ने गरीब जनता के ऊपर अत्याचार कर खूब कमाई किया, शनिवार और रविवार को लॉकडाउन लागू है जिसमें दुकानदार अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए चोरी छिपे दुकान खोलते हैं, वहीं छोटे दुकानदारों के चोरी छिपे दुकान खुला मिलने पर सख्त कार्यवाही हो रहा है।

छोटे दुकानदारो पर सख्ती बड़ो से प्यार

वहीं बड़े दुकानदारों के तरफ ध्यान नहीं देते क्योंकि उनसे पैसा जो मिल रहा है, मुंगराबादशाहपुर के लोगों में स्थानीय पुलिस प्रशासन के इस एक पक्षीय रवैये से बहुत खफा हैं। आए दिन कोटा पूरा करने के लिए लोगों को परेशान करना यहां के पुलिस का रोजमर्रा का काम हो चुका है। जबकि नगर में नो एंट्री लागू है इस दौरान बड़े दुकानदारों के ट्रक अंदर आ जाता है तो उस पर कार्यवाही क्यों नहीं होता है, क्योंकि वहां से मोटी कमाई हो जाती है, जो भी नियम कानून बनते हैं या बनाए जाते हैं, केवल गरीबों को परेशान और प्रताड़ित करने के लिए होता है, क्योंकि वो बोल नही पाते पुलिस की दादागिरी पर क्योंकि वो पुलिस के लफड़े में पड़ना और उलझना नही चाहते हैं। क्योंकि उनको प्रतिदिन कुआं खोदना है प्रतिदिन पानी पीना है।

अब बात करते हैं फेस मास्क की जिसको न लगाने पर पांच सौ से एक हज़ार जुर्माना लगाया जाता है लॉकडाउन के दौरान जहां लोगों के पैसे की किल्लत है, वहीं इस नए नियम कानून से जनता त्रस्त हो गई है, अगर फेस मास्क लोग न लगाकर बाहर निकले और पुलिस पकड़े ले तो ये पांच सौ लेकर कम से कम एक दो फेस मास्क ही दे देना चाहिए, जिससे लोगों में भी जागरूकता बढ़ेगी और लोग इससे प्रभावित भी होंगे पर ये न कर के केवल लॉकडाउन में जेब कैसे भरा जाए, इस पर स्थानीय पुलिस प्रशासन ध्यान दे रहा है।

 

 

 

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