भारत-चीन सीमा विवाद में उलझी कैलाश यात्रा, लोगों ने ऐसे किया मानसिक तीर्थ यात्रा

भारत-चीन सीमा विवाद में उलझी कैलाश यात्रा, लोगों ने ऐसे किया मानसिक तीर्थ यात्रा

भारत और चीन के बीच हो रहे विवाद के बीच काफी सारी दिक्कतें भारत को उठानी पड रही हैं, इन सब दिक्कतों का भारत काफी अच्छे से निवारण कर रहा है और उसमें कोई अच्छे से साथ दे रहा है, तो वह भारत की जनता, जैसा कि हम जानते हैं कि हर साल जून और सितम्बर के महीने के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा का आयोजन किया जाता है, लेकिन इस बार कोरोना और भारत-चीन के बीच उलझी इस यात्रा पर जा चुके लोग सोशल मीडिया के द्वारा अपने यात्रा को याद कर फोटोज़ शेयर कर रहे हैं.

कैलाश मानसरोवर निष्काम सेवा समिति अध्यक्ष उदय कौशिक एकअनोखी यात्रा पर हैं, जानकारों के मुताबिक, उदय कौशिक उन 20 हजार सूचियों में शामिल हैं, जो मानसरोवर तीर्थ का अभियान चला रहे हैं, हर साल जून से सितम्बर के बीच कैलाश पवर्त की यात्रा शुरू हो जाती है.

इस बार यात्रा में देरी होनी के कारण यात्रा पर जा चुके लोग सोशल मीडिया पर ग्रुप बनाकर अपनी पुरानी यात्रा के सहारे सोशलमीडिया पर धूमधाम से मना रहे हैं , सभी लोग पुरानी यात्रा की तस्वीरों और फोटोज़ को सोशलमीडिया पर डाल रहे हैं, साथ ही उदय कौशिक ने यह भी बताया कि यह समय मानसिक साधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है.

सोशल मीडिया पर लोग कैलाश दर्शन कर लिए अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहते हैं कि यदि इस यात्रा को सच्चे मन से पूरी श्रद्धा भाव से किया जाए , तो शिव को आत्मसात किया जा सकता है, कैलाश मानसरोवर यात्रा की शुरुआत 1981 में शुरू की गई थी, जानकारी के मुताबिक इस साल कैलाश मानसरोवर की यात्रा उत्तराखण्ड के रास्ते होने वाली थी, जिसमें दिनों का समय लगता था, सीमा संगठन द्वारा धारचुला से लेकर लिपुलेख के रास्ते बनाए गए हैं, इसलिए अब यात्रा तय करने में काफी कम समय लगता है.

 

 

 

 

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