जानें राफेल के बारे में सबकुछ, क्यों इसे ही चुना गया

भारत आ रहे हैं राफेल विमान, जानें राफेल के बारे में सबकुछ, क्यों इसे ही चुना गया

2019 के लोकसभा का चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा राफेल विमान की थी...

नई दिल्ली- 2019 के लोकसभा का चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा राफेल विमान की थी। विपक्ष राफेल मुद्दे के सहारे केंद्र सरकार को घेर रही थी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला और प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए ‘चौकीदार चोर है’ का नारा बुलंद किया। संसद में राफेल मामले पर घमासान के बाद कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली पर निशाना साधा। राहुल ने कहा कि जेटली जी कहते हैं कि 1600 करोड़ का नंबर कहां से आया? 58000 करोड़ को 36 से गुना कीजिये 1600 करोड़ का नंबर वहीं से आया है। राहुल ने कहा कि ‘डबल ए’ को मोदी ने कॉन्ट्रैक्ट दिया। जितनी सच्चाई को छुपाएंगे उतनी सच्चाई बाहर आएगी।

जानिए क्या है राफेल विमान?

राफेल विमान फ्रांस की डेसाल्ट कंपनी द्वारा बनाया गया 2 इंजन वाला लड़ाकू विमान है। राफेल लड़ाकू विमानों को ओमनिरोल विमानों के रूप में रखा गया है, जो कि युद्ध के समय अहम रोल निभाने में सक्षम हैं। हवाई हमला, जमीनी समर्थन, वायु वर्चस्व, भारी हमला और परमाणु प्रतिरोध ये सारी राफेल विमान की खूबियां हैं।

भारत ने इसलिए चुना राफेल

आर्थिक कारणों से भारतीय वायु ने लंबे टेस्ट के बाद राफेल को चुना। दरअसल राफेल विमान भारत सरकार के लिए एकमात्र विकल्प नहीं था। इस डील के लिए कई अंतरराष्ट्रीय विमान निर्माताओं ने भारतीय वायुसेना से पेशकश की थी। इनमें से छह बड़ी विमान कंपनियों को चुना गया। जिसमें लॉकहेड मार्टिन का एफ-16, बोइंग एफ/ए -18 एस, यूरोफाइटर टाइफून, रूस का मिग -35, स्वीडन की साब की ग्रिपेन और राफेल शामिल थे।

भारतीय वायुसेना ने विमानों के परीक्षण और उनकी कीमत के आधार पर राफेल और यूरोफाइटर को शॉर्टलिस्ट किया। यूरोफाइटर टायफून काफी महंगा है। इस कारण भी डलास से 126 राफेल विमानों को खरीदने का फैसला किया गया है।

19 साल से वायुसेना कर रही लड़ाकू विमान की मांग

भारतीय वायुसेना ने वर्ष 2001 में अतिरिक्त लड़ाकू विमानों की मांग की थी। रक्षा मंत्रालय ने लड़ाकू विमानों की वास्तविक खरीद प्रक्रिया 2007 में शुरू की। तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद ने अगस्त 2007 में 126 विमान खरीदने के प्रस्ताव पर को सहमति दी।

उल्लेखनीय है कि इस सौदे की शुरुआत 10.2 अरब डॉलर यानी 5,4000 करोड़ रुपये में होनी थी। 126 विमानों में 18 विमानों को तुरंत देने और अन्य की  तकनीक भारत को सौंपने की बात थी। लेकिन बाद में किसी कारणवश इस सौदे की प्रकिया रुक गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, विमान की कीमत लगभग 740 करोड़ रुपये है। वहीं भारत सरकार इन विमानों को 20 फीसदी कम लागत पर खरीदना चाहती थी। सरकार ने शुरुआत में 126 जेट खरीदने की योजना बनाई थी, लेकिन बाद में इसे घटाकर 36 कर दिया है।

2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 36 राफेल विमान खरीदने का फैसला लिया गया। इसके बाद वर्ष 2016 में केंद्र सरकार ने इस सौदे पर हस्ताक्षर किए। फिर जब फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांकोइस होलैंड ने भारत का दौरा किया तभी राफेल विमानों की खरीद के 7.8 अरब डॉलर के सौदे पर हस्ताक्षर हुए।

भारत के लिए क्यों है राफेल महत्वपूर्ण


भारत के लिए राफेल महत्वपूर्ण है। मिस्र और फ्रांस में पहले से ही राफेल जेट का प्रयोग किया जा रहा है, लेकिन भारत को मिलनेवाला राफेल अधिक अडवांस्ड तकनीक से लैस है। भारत की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसमें कुछ अतिरिक्त फीचर्स भी जोड़े गए हैं।

1- विमान में हेल्मेट माउंटेड साइट्स और लक्ष्य को भेदने की प्रणाली है ताकि पायलट बहुत कम समय में हथियारों को शूट कर सकें।
2- विमान में बहुत ऊंचाई वाले एयरबेस से भी उड़ान भरने की क्षमता है। लेह जैसी ऊंचाईवाली जगहों और ठंडे मौसम में भी विमान तेजी से काम कर सकता है।
3- मिसाइल अटैक का सामना करने के लिए विमान में खास तकनीक का प्रयोग किया गया है।
4- अगले 50 सालों तक के लिए फ्रेंच इंडस्ट्रियल सपॉर्ट भी मिलेगा।

ये है राफेल की खासियत

– राफेल की अधिकतम स्पीड 2,130 किमी/घंटा और 3700 किलोमीटर तक मारक क्षमता।
– राफेल एक मिनट में 60 हजार फुट की ऊंचाई तक जा सकता है। 4.5 जेनरेशन के ट्विन इंजन से लैस।
– अधिकतम भार उठाकर इसके उड़ने की क्षमता 24500 किलोग्राम है। 60 घंटे अतिरिक्त उड़ान की गारंटी।
– विमान में फ्यूल क्षमता- 17,000 किलोग्राम है।
– यह दो इंजन वाला लड़ाकू विमान है, जो भारतीय वायुसेना की पहली पसंद है। हर तरह के मिशन में भेजा जा सकता।
-150 किमी की बियोंड विजुअल रेंज मिसाइल, हवा से जमीन पर मार वाली स्कैल्प मिसाइल।
– स्कैल्प मिसाइल की रेंज 300 किमी, हथियारों के स्टोरेज के लिए 6 महीने की गारंटी।
– 75 फीसदी विमान हमेशा ऑपरेशन के लिए तैयार हैं, परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।

 

 

 

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