यही है वो महिला जो रेलवे स्टेशन पर बोलती है 'यात्रीगण कृपया ध्यान दें'
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यही है वो महिला जो रेलवे स्टेशन पर बोलती है ‘यात्रीगण कृपया ध्यान दें’

नई दिल्ली: जहां एक ओर भारतीय रेलवे यातायात के एक प्रमुख साधन के रूप में जानी जाती है। तो वहीं दूसरी तरफ ट्रेन से एक साथ हजारों की संख्या में लोग लंबी दूरियों के सफर कम समय में तय कर लेते हैं। देश की तरक्की में ट्रेन का एक महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वहीं रेलवे स्टेशन पर पहुँचते ही आज भी एक मधुर ध्वनि कानों में गूंज उठती है, ‘ यात्रीगण कृपया ध्यान दें ’ जिसे हर कोई बड़े ही ध्यान से सुनता है।

बता दें कि वह ध्वनि रेल के विषय में जानकारी दे रही रेलवे उद्घोषक की होती है। लेकिन क्या आपको पता है कि हमेशा एक जैसी लगने वाली इस आवाज के पीछे वह महिला कौन है? तो आज हम आपको इनकी पहचान करवाने जा रहें हैं।रेलवे स्टेशन पर अनाउंसमेंट करते समय आपको जिस महिला की आवाज़ सुनाई देती है, उनका नाम सरला चौधरी है।

हालांकि अब सरला रेलवे में कार्यरत नहीं, लेकिन उनकी रिकॉर्ड की गई ध्वनि आज भी रेलवे स्टेशनों पर गूंजती है। सरला रेलवे में पिछले 20 सालों से अनाउसमेंट कर रही है। साल 1982 में सरला ने अनाउसमेंट के पद पर परीक्षा दी थी। परीक्षा में पास होने के बाद उन्हें सेंट्रल रेलवे में दैनिक मजदूरी पर रखा गया था। जिसके बाद उनकी मधुर आवाज के चलते उन्हें साल 1986 में यह पद दे दिया गया था।

एक इंटरव्यू के दौरान सरला ने बताया की पहले समय में कम्प्यूटर न होने की वजह से अनाउसमेंट के लिए मुझे खुद  हर एक स्टेशन पर जाना पड़ता था। आगे कहा कि वह कई बार अलग-अलग भाषाओं में भी अनाउसमेंट कर चुकी है। जिनकी रिकॉर्ड करने में करीब 3 से 4 दिन लग जाते थे, लेकिन उसके बाद अनाउसमेंट का सारा काम ट्रेन मेनेजमेंट को ही दे दिया गया था।

स्टैंड बाय मोड पर सरला की आवाज को इस विभाग ने कंट्रोल रूम में सेव कर लिया है। आगे सरला बताती हैं कि निजी कारणों के चलते 12 साल पहले वह इस काम को छोड़ चुकी हैं। वर्तमान में वह OHE विभाग में कार्यालय अधीक्षक के रूप में तैनात हैं। स्टेशन पर जब लोग उनकी आवाज़ की तारीफ बिना देखे करते हैं, तो उन्हें काफी खुशी मिलती है।

बता दें कि सरला के पिता एक रेलवे कर्मचारी थे और उन्हें एक सर्कुलर मिला। जिसमें लिखा था कि भारतीय रेलवे कर्मचारियों के बच्चों को अनाउंसमेंट डिपार्टमेंट 3 महीने के ट्रायल पर भर्ती कर रहा है। इस सर्कुलर को पढ़ने के बाद सरला को भी लगा कि यहां 3 महीने बीता कर अच्छा कार्य अनुभव मिल जाएगा और उन्हें आवेदन भर दिया। समय के साथ सरला को इस काम में आनंद आने लगा और उन्होंने इसे अपना प्रोफेशन बना लिया।

 

 

 

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