कभी आईपीएल को बताया था भारतीय संस्कृति के लिए खतरा अब उसी से जुड़ने को बेताब हैं बाबा रामदेव

नई दिल्ली- इंडियन प्रीमियर लीग 2020 के टाइटल स्पॉन्सरशिप के लिए बीसीसीआई की ओर से प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए बीसीसीआई ने ईओआई भी जारी कर दी है। आईपीएल के इस साल के टाइटल स्पॉन्सर की दौड़ में योगगुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि भी इस दौड़ में शामिल हो गई है। बाबा रामदेव की कंपनी के प्रवक्ता एसके तिजारावाला ने भी पतंजलि के स्पॉन्सरशिप की रेस में होने की पुष्टि की है। बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि

आयुर्वेद भले ही आज आईपीएल की स्पॉन्सरशिप के लिए बोली लगाने की तैयारी कर रही है, लेकिन कुछ साल पहले खुद उन्होंने क्रिकेट को भारतीय संस्कृति का दुश्मन बताया था। बाबा रामदेव ने 2012 में क्रिकेट को भारतीय संस्कृति का दुश्मन करार दिया था। इसके अलावा आईपीएल पर खासतौर पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा था कि चीयरलीडर्स की मौजूदगी के चलते यह खेल अश्लील हो गया है।

आईपीएल को भ्रष्टाचार की व्यूह रचना कहा था

कभी आईपीएल को बताया था भारतीय संस्कृति के लिए खतरा अब उसी से जुड़ने को बेताब हैं बाबा रामदेव

योगगुरु बाबा रामदेव ने कहा है कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) कुछ नहीं बल्कि भ्रष्टाचार और रिश्वत की व्यूह रचना है। रामदेव ने कहा था, आपीएल में भारी मात्रा में काला धन इसमें निवेश किया जा रहा है, इसलिए यह अब काला खेल है। 2012 में उन्होंने अपने रोडशो के दौरान लोगों से कहा, यह विलासिता की निशानी है। रामदेव ने कहा, इस अनैतिक चक्र को देश के भले के लिए खत्म किया जाएगा। सब जगह लूट मची है।

बीसीसीआई और वीवो ने आपसी सहमति से स्पॉन्सरशिप के करार को खत्म करने का लिया था फैसला

बीसीसीआई ने इस पर सोमवार से एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट की मांग की है और 14 तारीख तक कंपनियों को प्रस्ताव सौंपने हैं। इससे पहले बीते सप्ताह बीसीसीआई और वीवो ने आपसी सहमति से 2020 के आईपीएल टूर्नामेंट के लिए स्पॉन्सरशिप के करार को खत्म करने का फैसला लिया था। दरअसल लद्दाख में सीमा पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प के बाद से ही चीनी कंपनियों के खिलाफ माहौल बना हुआ है। इसे देखते हुए ही वीवो ने स्पॉन्सरशिप से हटने का फैसला लिया है।

वीवो का पांच साल का 2190 करोड़ रूपए का था करार

बता दें, विवो ने 2018 से 2022 तक पांच साल के लिए 2190 करोड़ रूपए (प्रत्येक वर्ष करीब 440 करोड़ रूपए) में आईपीएल प्रायोजन अधिकार हासिल किए थे। बीसीसीआई के अपने संविधान के अनुसार नए टाइटल प्रायोजक के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू करने की संभावना है।टाइटल प्रायोजन आईपीएल के व्यवसायिक राजस्व का अहम हिस्सा है जिसका आधा भाग सभी आठों फ्रेंचाइजी में बराबर बराबर बांटा जाता है।

 

 

 

 

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