क्या विकास दुबे का हुआ फेक‌ एनकाउंटर, शक के घेरे में यूपी पुलिस

बड़े नामों को बचाने के लिए क्या पुलिस ने किया विकास दुबे का फेक एनकाउंटर? उठ रहे कई बड़े सवाल

दुर्दांत अपराधी विकास दुबे का कानपुर के पास सड़क हादसे में एनकाउंटर कर दिया गया है जिसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस पर फेक एनकाउंटर के सवाल उठ रहे हैं।

5 लाख के इनामी दुर्दांत अपराधी विकास दुबे को लेकर उत्तर प्रदेश ने पुलिस जिस प्रकार का रवैया अख्तियार किया वो हजारों सवाल खड़े करने के साथ पुलिस की फजीहत कर रहे हैं। विकास दुबे क सुबह तड़के कानपुर में एनकाउंटर कर दिया गया है, लेकिन ये एक फेक एनकाउंटर लग रहा है। उत्तर प्रदेश पुलिस जितनी पाक साफ बनने की कोशिश कर रही है असल में वह है नहीं।

अचानक सड़क मार्ग का फैसला

विकास दुबे को उज्जैन में गिरफ्तार किया गया। मध्य प्रदेश एसटीएफ ने उसको ट्रांजिट रिमांड के तहत यूपी एसटीएफ को सौंपा। खबरें आई थी उज्जैन से विकास दुबे फ्लाइट से लखनऊ लाया जाएगा। लेकिन शाम होते-होते फ्लाइट से लाने की बातें हवा हो गई। यूपी एसटीएफ उसे सड़क मार्ग से कानपुर लाने के लिए निकल पड़ी।

यूपी पुलिस का लापरवाही

उत्तर प्रदेश पुलिस कर्मी शुरू से ढुलमुल रवैया बनाए हुए थे। कानपुर में 2 दिन रहा कानपुर से बाहर फरीदाबाद चला गया फरीदाबाद से फिर उज्जैन निकल गया। यूपी पुलिस खाक छानती रह गई। इतनी जगह टोल नाके चेकिंग लेकिन सब कुछ विकास के लिए धरा का धरा रह गया। विकास दुबे को पुलिस नहीं पकड़ पाई।

यही नहीं इसके अलावा जब पुलिस गिरफ्तार विकास दुबे को लेकर कानपुर आ रही थी तब भी इतना ढुलमुल रवैया जिसकी हद नहीं। विकास के हाथ में कोई हथकड़ी नहीं थी सभी के मन में ये सवाल हैं कि ऐसा क्यों हुआ ? जिस गाड़ी से विकास भागा उसका कांच एक ही टूटा, सवाल यह भी है कि कैसे जिस टूटे हुए शीशे से विकास दुबे बाहर निकला उसी से यूपी एसटीएफ के जवान बाहर निकले।

मिलती-जुलती कहानी

यूपी पुलिस जितने भी एनकाउंटर करती है। सभी की गाड़ी का या तो टायर पंचर होता है या एक्सीडेंट होता है या गाड़ी में खराब नहीं आती है और फिर अपराधी भागता है और पुलिस मुठभेड़ में एनकाउंटर कर देती है यूपी पुलिस का यही रवैया हो गया है ठांय ठांय वाली है पुलिस हमेशा शक के दायरे में रहती है और विकास दुबे के मामले में भी यही हुआ।

सवाल यह भी है कि जब मध्य प्रदेश से चले थे तो गाड़ी सफारी थी और फिर जब यूपी में आए और कानपुर में पहुंचे तो दुर्घटना TUV की हुई। ऐसा क्या खेल हो गया कि यूपी पुलिस को रास्ते में विकास दुबे को दूसरी गाड़ी में शिफ्ट करना पड़, क्यों टोल नाके के पास गाड़ी का पीछा कर रहे हैं मीडिया कर्मियों को चेकिंग के बहाने रोका गया और उसके बाद क्यों केवल विकास दुबे वाली गाड़ी की रफ्तार पकड़ने लगी, ये सवाल यूपी पुलिस के लिए मुश्किलें खड़ी करेंगे और ये संदेह जताएंगे कि ये फेक एनकाउंटर था।

फेक एनकाउंटर की साज़िश

विकास दुबे के पांचों सहयोगी एनकाउंटर में मारे गए हैं पुलिस की थ्योरी हर एक एनकाउंटर में एक जैसी है। विकास दुबे के मामले में भी सवाल है कि क्या यूपी पुलिस के चालक इतने ढीले हैं कि 12 घंटे गाड़ी चलाने के बाद वह अपना होश खो बैठते हैं उन्हें नींद आने लगती है और नींद इतनी आती है की गाड़ी पलट जाती है अपराधी भागने लगता है ऐसी नौबत एनकाउंटर तक की जाती है। पुलिस का रवैया इशारा करता है की एक सोची समझी रणनीति के तहत किया गया और इसमें का एनकाउंटर को हाथ से का नाम लेकर पल्ला झाड़ा जा रहा है।

 

 

 

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