गांधी परिवार ट्रस्ट की जांच के लिए समिति गठित

चीन से चंदा लेने पर गांधी परिवार के तीन ट्रस्टों की जांच के लिए समिति गठित

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गांधी परिवार के तीन ट्रस्ट राजीव गांधी फाउंडेशन, राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट और इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट पर कानूनी प्रावधानों के उल्लंघनों की जांच के लिए एक अंतर मंत्रालयी समिति का गठन किया है। प्रवर्तन निदेशालय के एक विशेष निदेशक की अगुवाई में यह समिति फाउंडेशन की जांच करेगी।

राजीव गांधी फाउंडेशन की स्थापना 21 जून 1991 में हुई थी। यह फाउंडेशन साक्षरता, स्वास्थ्य, विकलांगता, वंचितों के सशक्तीकरण, आजीविका और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में काम करता है। हालांकि वर्तमान में इसका फोकस क्षेत्र शिक्षा, विकलांगता और प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में है।

सोनिया गांधी राजीव गांधी फाउंडेशन की अध्यक्ष हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम बोर्ड के सदस्य हैं। हाल ही में भारतीय जनता पार्टी द्वारा कांग्रेस और गांधी परिवार को निशाना बनाते हुए दावा किया कि चीन ने राजीव गांधी फाउंडेशन को चंदा दिया था, जिसके बाद केंद्र ने अब यह कदम उठाया है।

बीते माह केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इससे कांग्रेस से स्पष्टीकरण मांगा था कि चीनी दूतावास ने फाउंडेशन को लगभग 90 लाख रुपये क्यों दान किए हैं। भारत में चीनी दूतावास और चीन की सरकार फाउंडेशन के कथित दानदाता हैं। भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने 27 जून को यह आरोप लगाया था कि 2005-08 के बीच प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में प्राप्त धनराशि को राजीव गांधी फाउंडेशन में भेज दिया गया था। वहीं, राजीव गांधी चैरिटेबल ट्रस्ट 2002 में स्थापित हुआ था। बताया गया था कि एक पंजीकृत गैर-लाभकारी संगठन है, जो देश में वंचितों, विशेष रूप से ग्रामीण गरीबों की विकासात्मक जरूरतों को पूरा करने के लिए स्थापित किया गया है।

इसके बोर्ड में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, व्यवसायी अशोक गांगुली और चार्टर्ड अकाउंटेंट बंसी मेहता हैं। ट्रस्ट के नाम का उल्लेख हरियाणा में सीबीआई द्वारा एक कथित जमीन हड़पने के मामले में किया गया है, जिसमें एजेंसी ने सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को मुख्य आरोपी बनाया है।

तत्कालीन हरियाणा सरकार ने सार्वजनिक हित के नाम पर 2004-14 के दौरान कथित रूप से पंचायत भूमि को चैरिटेबल ट्रस्ट को सौंप दिया था। कांग्रेस ने बुधवार को पलटवार करते हुए कहा कि अगर भाजपा राहुल गांधी पर झूठे और असफल हमले करने के बजाय राष्ट्रीय हित के मुद्दों को हल करने के लिए अपनी ऊर्जा और समय का उपयोग करे, तो यह देश के लिए अच्छा होगा।

 

 

 

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