क्या बन गई कोरोनावायरस की वैक्सीन, कितना है इस दावे में दम और कब शुरु होगा इसका उपयोग?
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इटली और इजरायल का दावा बना ली है कोरोनावायरस की दवा, WHO और अमेरिका ने कही ये बात

कोनावायरस की वैक्सीन बनाने को लेकर इटली औऱ इजराइल ने सफल परीक्षण की बात कही है।

वैश्विक महामारी कोविड-19 यानी कोरोनावायरस के कारण पूरी दुनिया में अफरा-तफरी की स्थिति है।  दुनिया में अब तक इस कोरोनावायरस से लोग संक्रमित हो चुके हैं वहीं लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। सभी को इंतजार है तो बस इस खतरनाक बीमारी की दवा यानी कोरोनावायरस की वैक्सीन का… लेकिन इस दवा को लेकर क्या काम हो रहा है इसमें अभी पशोपेश की स्थिति बनी हुई है। अलग-अलग देशों के वैक्सीन को लेकर अपने दावे हैं। सभी का कहना है कि उन्होनें कोरोनावायरस की वैक्सीन इजात कर ली है। हालांकि इसमें कितनी सच्ची है ये कहना बेहद मुश्किल है।

इटली में चूहों पर सफल परीक्षण

कोरोनावायरस से बड़े पैमाने पर प्रभावित हुए यूरोपीय देश इटली का दावा है कि उसने कोरोनावायरस की वैक्सीन इजात कर ली है और इसका चूहों पर सफल परीक्षण भी किया है। इस मामले में जानकारी दी गई है कि चूहों पर इस वैक्सीन के प्रयोग से चूहों में जो एंटी बॉडी विकसित हुई हैं ये इन्सानों के शरीर के लिए भी कारगर और उनके शरीर में सही से काम करते हैं। इटली में बनी ये वैक्सीन सबसे बेहतरीन मानी जा रही है। यही नहीं अरब देशों की एक रिपोर्ट में भी यह दावा किया गया है कि इटली ने सबसे पहले कोरोनावायरस की वैक्सीन बनाई है जो कि इटली के ही ‘इंफेक्शियस डिसीज स्पैलनज़ानी हॉस्पिटल’ में बनी है। इस रिपोर्ट में भी दावा किया गया है कि इस वैक्सीन का चूहों में परीक्षण करने पर उनमें एंटीबॉडी डेवेलप हुईं जो कि मानव की कोशिकाओं में भी सही तरह काम करती है और ये कोरोनावायरस को ब्लॉक करती हैं।

इजराइल ने भी किया वैक्सीन का दावा

कोरोनावायरस की वैक्सीन को लेकर इटली के अलावा इजराइल ने भी दावा किया है कि उसने वेक्सीन का सफल परीक्षण कर लिया है और इसका प्रोडक्शन भी शुरू हो गया है। इजराइल के रक्षामंत्री नफताली बैनेट ने ऐलान किया कि इजराइल के मुख्य जैविक अनुसंधान के वैज्ञानिकों ने कोरोनावायरस की वैक्सीन का सफल परीक्षण कर लिया है और इंसानों में एंटीबॉडी विकसित करने वाले टीके के सभी चरणों को सफलता पूर्वक पास कर लिया है अब इसके पेटेंट के बाद वैक्सीन के प्रोडक्शन का काम तेजी से चल रहा है।

सभी के हैं वैक्सीन के दावे

कोरोनावायरस की वैक्सीन बनाने को लेकर सभी राष्ट्रों के अपने-अपने दावे हैं, लेकिन कौन सच में कोरोना के खिलाफ इस जंग में कारगर है ये कहना बेहद मुश्किल है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि 2020 के अंत तक अमेरिका कोरोनावायरस की वैक्सीन बना लेगा। दुनिया भर में लगभग 100 से अधिक वैक्सीन का ट्रायल किया जा रहा है।

नहीं बन पाएगी कोरोनावायरस की वैक्सीन

वहीं इस मसले पर विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO का कहना है कि कोरोनावायरस की वैक्सीन कभी बन ही न पाएगी जैसे एचआईवी और डेंगू के लिए भी कई सालों से कोई वैक्सीन नहीं बन पाई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन में कोविड-19 के विशेष दूत डेविड नैबोरो ने कहा है कि ये हो सकता है कि कोरोनावायरस की वैक्सीन कभी बन ही न पाए क्योंकि कई ऐसे वायरस हैं जिनकी कोई वैक्सीन नहीं है और हो सकता है जो वैक्सीन बने वो पूरी तरह से कारगर न हो।

यहीं नहीं WHO समय-समय पर बिना परीक्षण वाली दवाओं के उपयोगों पर समय-समय पर आगाह करता रहा है। कोरोनावायरस के इलाज में संजीवनी बनीं मलेरिया की दवा हाइड्रोक्सी क्लोरोक्विन की लेकर भी WHO ने एडवाइजरी जारी करत हुए इसके उपयोग को खतरनाक बताते हुए रोक लगाई थी, हालांकि अमेरिका ने इस बात को नजरअंदाज कर दिया यहां तक कि डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि वो खुद ये दवा इस्तेमाल कर चुके हैं। कोरोनावायरस की वैक्सीन को लेकर हर तरफ से दावे तो हो रहे हैं पर हकीकत ये है कि किसी भी दावे का कोई ठोस आधार अभी तक नहीं मिला है।

 

 

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