1700 तारीखों के बाद मिला राजा मान सिंह को न्याय 
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1700 तारीखों के बाद मिला राजा मान सिंह को न्याय, जाने पूरी डिटेल्स

उत्तर प्रदेश के मथुरा न्यायालय में चल रहे भरतपुर के राजा मान सिंह हत्याकांड मामले में 35 साल बाद बुधवार को निर्णायक फैसला सामने आया। इस हत्याकांड में 11 पुलिस कर्मियों के खिलाफ फैसला सुनाते हुए न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा दी है। इस मौके पर राजा मान सिंह का परिवार मौजूद रहा। राजा मान सिंह की बेटी कृष्णेंद्र कौर उर्फ दीपा सिंह बुधवार को अदालत में मौजूद रहीं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ही मथुरा जिला जज की अदालत में मुकदमे की सुनवाई हो रही थी।

21 फरवरी 1985 को हुए इस बहुचर्चित हत्याकांड की सुनवाई में फैसला तब आया है जब 25 जिलाजज बदल गए और 1700 तारीखें पड़ीं जो किसी इतिहास से कम नहीं। गौरतलब है कि यह बहुचर्चित केस 1990 में मथुरा जिलाजज कोर्ट में राजस्थान से ट्रांसफर किया गया था।

35 साल बाद 22 जुलाई 2020 को निर्णायक फैसला सामने आया। वादी पक्ष के अधिवक्ता नारायण सिंह विप्लवी ने बताया कि इस मामले में अबतक आठ बार फाइनल बहस हुई, कुल 78 गवाह प्रस्तुत हुए। जिनमें से 61 गवाह वादी पक्ष के थे तो 17 गवाह बचाव पक्ष ने प्रस्तुत किए।

यह था मामला

जानकारी के मुताबिक घटना 21 फरवरी 1985 की है। उस दौरान राजस्थान चुनावी रंग में रंगा हुआ था। डींग विधानसभा क्षेत्र के निदर्लीय उम्मीदवार राजा मान सिंह चुनाव प्रचार के लिए अपनी जोंगा जीप लेकर लालकुंडा के चुनाव कार्यालय जा रहे थे। इस दौरान वह डींग थाने के सामने से निकले।

पुलिस ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया औऱ ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी थी। इस घटना में राजा मान सिंह के साथ ही सुमेर सिंह और हरि सिंह की भी मौत हो गई थी। सभी के शव जोंगा जीप में ही मिली थी। उस समय इस हत्याकांड में 18 पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।

सुनवाई के दौरान एएसआइ नेकीराम, कांस्टेबल कुलदीप और सीताराम की मौत हो चुकी है। वहीं, सीओ कान सिंह भाटी के चालक महेंद्र सिंह को पहले ही जिला जज की आदालत बरी कर चुकी है।

20 फरवरी 1985 को पड़ गई थी हत्याकांड की नीव

जानकारों के मुताबिक इस हत्याकांड की नीव 20 फरवरी 1985 को ही पड़ गई थी। राजस्थान के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिव चरण माथुर की चुनावी सभा 20 फरवरी को तय की गई थी। यह सभा होने से पहले कांग्रेसियों ने राजा मान सिंह कि रियासत के झंडे उखा़ड़कर फेंक दिए थे। इससे क्रोधित राजा मान सिंह अपनी जोंगा जीप से मुख्यमंत्री के सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए उनके हेलीकॉप्टर के पास जा पहुंचे। मान सिंह ने हेलीकॉप्टर को जीप की टक्कर से क्षतिग्रस्त कर दिया था। हालांकि मुख्यमंत्री तबतक वहां से जा चुके थे।

मुख्यमंत्री को वहां न पाया देख राजा मान सिंह, मुख्यमंत्री के सभा स्थल पहुंच गए औऱ उनके चुनावी मंच को ध्वस्त कर दिया। टूटे मंच से ही चुनावी सभा को संबोधित करने के बाद मुख्यमंत्री ने पुलिस के आलाधिकारियों को जमकर लताड़ लगाई थी। जिसके बाद राजा मान सिंह के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।

आरोप है कि दूसरे दिन 21 फरवरी को जब राजा मान सिंह डीग थाने के सामने से गुजरे तो सीओ कान सिंह भाटी ने उनका रास्ता पुलिस वाहन से रोक दिया। इसके बाद लोगों ने सिर्फ फायरिंग की आवाजें सुनीं। इस घटना के बाद डीग थाना के एसएचओ वीरेंद्र सिंह ने राजा मान सिंह के दामाद विजय सिंह सिरोही के खिलाफ भी जानलेवा हमले की धारा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

इन्हें हुआ आजीवन कारावास

सीओ कान सिंह भाटी, एसएचओ वीरेंद्र सिंह, एएसआई रवि शेखर, कांस्टेबल सुखराम, कांस्टेबल जीवनराम, कांस्टेबल भंवर सिंह, कांस्टेबल हरि सिंह, कांस्टेबल शेर सिंह, कांस्टेबल छत्तर सिंह, कांस्टेबल पदमाराम, कांस्टेबल जगमोहन को सजा हुई। तो वहीं, निरीक्षक, कान सिंह सिरवी, जीडी लेखक कांस्टेबल गोविंद राम और हरि किशन को बरी किया गया है।

 

 

 

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