भारत-चीन बॉर्डर पर शहीद हुए जवान का हुआ सम्मान अंतिम संस्कार
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भारत-चीन बॉर्डर पर शहीद हुए स्पेशल फ्रंटियर फोर्स के कमांडो नईमा तेनजिंग का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

भारत-चीन बॉर्डर पूर्वी लद्दाख में सीमा पर चीन की घुसपैठ की कोशिश के दौरान माइन ब्लास्ट में स्पेशल फ्रंटियर फोर्स के कमांडो नईमा तेनजिंग शहीद हो गए. भारत चीन के बॉर्डर पर शहीद हुए नायमा तेनजिंग का अंतिम संस्कार लेह की तिब्बती बस्ती में बौद्ध मन्त्रों के साथ ही पूरे सम्मान के साथ कर दिया गया. इसी दौरान सभी लोगों ने हाथ में तिरंगा थामकर ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए.

बता दें कि पूर्वी लद्दाख में चीन की सीमा पर ऑपरेशन ब्लैक टॉप के दौरान नायमा तेनजिंग 31 अगस्त को शहीद हुए थे. अंतिम संस्कार के समय शहीद हुए नायमा तेनजिंग को बंदूक की सलामी दी गई. नाइमा तेनजिंग 51 साल के थे. साथ ही साथ इसी मौके पर शामिल हुए तिब्बतियों ने भी अपने समुदाय का झंडा और तिरंगा साथ में फहरा कर एकजुटता का भी संदेश दिया.

 

भारत के वीर जवानों ने 29 अगस्त की रात लद्दाख के पैंगॉन्ग इलाके में चीन के घुसपैठियों की कोशिशों को नाकाम कर दिया था. भारतीय जवानों की इस ऑपरेशन में तिब्बत के जवानों की टीम भी शामिल थी. हम आपको बता दें कि विकास रेजिमेंट में तिब्बत के निर्वासित लोगों को और गोरिल्ला युद्ध में महारथ रखने वाले सैनिकों को तरजीह दी जाती है.

नईमा तेनजिंग भारतीय सेना की खुफिया बटालियन विकास रेजिमेंट की कंपनी के लीडर थे. वैसे तो नईमा जिस फोर्स में थे उसके बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नहीं थी. उस फोर्स के जवानों के शहीद हो जाने पर ज्यादातर खबरें सामने नहीं आ पाती हैं, लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ और नाइमा तेनजिंग का पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. हम आपको बता दें कि तेनजिंग की श्रद्धांजलि के दौरान भाजपा के महासचिव राम माधव भी वहां पर मौजूद थे.

 

स्पेशल फ्रंटियर फोर्स (एसएफएफ) का गठन 1962 में भारत चीन के युद्ध के दौरान ही हुआ था. शहीद नईमा तेनजिंग 33 साल से इस फोर्स में थे. हम आपको बता दें कि शहीद हुए नाइमा तेनजिंग की शहादत की खबर के बारे में केंद्र सरकार ने कोई भी घोषणा नहीं की थी. तिब्बत संसद के निर्वाचित सदस्य नामग्याल डोलकर लघियारी ने बताते हुए कहा कि चुशूल के ब्‍लैक टॉप पर चीन के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान एक जवान शहीद हो गया था. यह भी बताया गया कि शहीद नईमा तेनजिंग के परिवार में उनकी पत्नी और तीन बच्चे भी हैं.

 

 

 

शहीद कमांडो नाइमा तेनजिंग के सम्मान में एक कविता-

सबकुछ छोड़ कर देश पर मर जाते हैं
ये देवता जाने से कहाँ से आते हैं
ये देवता जाने कहाँ से आते हैं

ना दिखे माँ की ममता ना दिखे इनको परिवार हैं
पूछो तो कहते देश ही तो घर बार हैं
करने को इनकी सेवा पत्थर भी खाते हैं
ये देवता जाने कहाँ से आते हैं
ये देवता जाने कहाँ से आते हैं

धूप, बारिश या घना हो कोहरा रोड , सरहद या कोई चौराहा
मार मौसम की हो वार दुश्मन का या कोई महामृग सही
देश मे हो इलेक्शन या दंगे खड़े
ये सैनिक ही देश का गौरव मानसम्मान हैं।

-Payal Sri ‘Atal’

 

 

 

 

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