राजस्थान की गहलोत सरकार पर मंडरा रहे सियासी संकट के बादल, उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट की बगावत के संकेत

नई दिल्ली: राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट का अचानक गुम हो जाना राजस्थान के मुख्यमंत्री और कांग्रेस सरकार के लिए एक मुश्किल की घड़ी साबित हो सकता है। रात से एक बड़ी खबर आ रही है जिसने राजस्थान की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत मुश्किलों में घिर गए हैं सब कुछ उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट पर निर्भर करने लगा है।

गायब हैं सचिन पायलट

राजस्थान की गहलोत सरकार पर मंडरा रहे सियासी संकट के बादल, उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट की बगावत के संकेत

सचिन पायलट के गायब होने की खबरें आने के बाद अचानक आनन-फानन में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कैबिनेट मीटिंग बुलाई कैबिनेट मीटिंग में उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट मौजूद नहीं थे और इसने राजस्थान की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

सचिन पायलट के मामले को देखते हुए राजस्थान सरकार ने राजस्थान की सभी सीमाएं सील कर दी है। कहने को तो यह कोरोना के चलते उठाया गया कदम है, पर इसमें असली खेल राजनीति का ही है क्योंकि अशोक गहलोत को अपनी कुर्सी जाने का डर सताने लगा हैं जिसको लेकर कांग्रेस भी चिंता में है।

25 विधायकों का समर्थन

खबरें अभी है राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के साथ 25 विधायकों का समर्थन है और यह सभी 25 विधायक भी राजस्थान से गायब है। दावे तो ये भी हैं कि सचिन पायलट इन 25 विधायकों के साथ दिल्ली में ठहरे हुए हैं दिल्ली के आईटीसी होटल को इन विधायकों का सुरक्षित ठिकाना माना जा रहा है और ये सभी भाजपा के संपर्क में हैं।

बागी रहे हैं सचिन पायलट

आपको बता देंगे सचिन पायलट शुरू से ही राजस्थान में मुख्यमंत्री पद के बड़े दावेदार थे लेकिन अचानक दिल्ली से अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री के लिए भेजे जाने पर सचिन पायलट ने पार्टी में आंतरिक रूप से नाराजगी जताई थी। उस समय पर पार्टी विरोधी बातें करते रहते हैं। जोधपुर में हुए नवजात बच्चों के मामले में भी उन्होंने अपनी सरकार पर ही सवाल खड़े कर दिए थे। इन सभी संकेतों को देख कर लग रहा है कि राजस्थान की राजनीति में कुछ बड़ा होने वाला है।

राजस्थान की गहलोत सरकार पर मंडरा रहे सियासी संकट के बादल, उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट की बगावत के संकेतसिंधिया की राह पर पायलट

मार्च में मध्य प्रदेश की राजनीति में भी बड़ा भूचाल आया था। और होली के आते आते मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार का दिवाला निकल गया था। लगभग 22 विधायकों के साथ मध्य प्रदेश के बड़े नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पार्टी छोड़ दी थी और पार्टी छोड़ने के बाद उस वक्त दिल्ली में मौजूद सचिन पायलट के घर पर भी ज्योतिरादित्य सिंधिया गए थे। इसी के चलते ये सवाल भी खड़े हो रहे हैं कि क्या यह सब पहले से ही किसी प्लानिंग का हिस्सा था और क्या सचिन पायलट अपने मित्र ज्योतिरादित्य सिंधिया की राह पर निकल पड़े हैं।

आया है बुलावा

इसी बीच एक और बड़ी खबर आई है राजस्थान एसओजी ने उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट को सरकार गिराने के मामले में नोटिस भेजा है और उनसे जवाब मांगा है यह सभी जवाब उन्हें उनकी यथावत मौजूदगी में देने होंगे सीधे शब्दों में कहा जाए तो पायलट को बुलाया गए हैं लेकिन देखना ये होगा कि पायलट जाते हैं या नहीं क्योंकि सुबह हुई कैबिनेट मीटिंग में भी पायलट अनुपस्थित थे।

हो गई सिर फुटौव्वल

बड़ी बात यह है कि कांग्रेस नहीं अब अंदर खाने यह सौगात शुरू हो गई है कि सरकार जाने वाली है इसके संकेत दिए हैं देश के पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल उन्होंने अपने ट्विटर पर जो बात लिखी है साबित करती है कि राजस्थान की राजनीति में बड़ी सर फुटौव्वल हो गई है और इसका फायदा भाजपा को मिलेगा।

 

 

 

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