विकास दुबे की क्राइम कुंडली, जाने कैसे एक छोटा सा अपराधी बन बैठा इतना बड़ा हिस्ट्रीशीटर

जमीन की सौदेबाजी को बना रखा था धंधा, राजनितिक संरक्षण का जमकर उठाता था फायदा, बन बैठा था भू माफिया

उत्तरप्रदेश कानपुर एनकाउंटर में आठ पुलिसकर्मियों को मौत की नींद सुलाने वाले हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे का अपराधिक इतिहास चौंकाने वाला है। 19 वर्ष पूर्व भाजपा की ही सरकार में सत्ताधारी दल के दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री को थाने में घुसकर मौत के घाट उतारने वाला अपराधी यदि अभी भी खुलेआम घूम रहा है तो यह समझने के लिए काफी है कि बिना राजनीतिक संरक्षण के यह संभव नहीं हो सकता.

हर सरकार में रहा दबदबा….

सरकार किसी की भी रही हो विकास दुबे की बादशाहत हमेशा कायम रही। अपराध की दुनिया में कदम रखने के बाद इसी राजनीतिक संरक्षण का फायदा उठाकर विकास दुबे ने जमीन की सौदेबाजी को अपना मुख्य कारोबार बना लिया। बेसकीमती जमीनों के मालिकों को धमकाकर कम कीमत में खरीद लेना विकास का शगल था। राजनीतिक संरक्षण देने वालों ने भी इस बात का जमकर फायदा उठाया। आखिरकार विकास अपने और अपने आकाओं के लिए कुख्यात भूमाफिया बन बैठा।

सफेदपोश  प्रॉपर्टी डीलर तक उससे अपना काम निकलवाते थे….

बताते हैं कि कानपुर नगर, कानपुर देहात, इटावा, औरैया के साथ ही प्रदेश की राजधानी लखनऊ तक में विकास की बादशाहत कायम है। इन जिलों में कहीं भी कोई कीमती जमीन दिखती तो उसकी सौदेबाजी विकास दुबे और गुर्गों के जरिये ही होती।
आसपास के कई जिलों के सफेदपोश  प्रॉपर्टी डीलर तक उससे अपना काम निकलवाते थे। महंगी जमीन को सस्ते में खरीदवाकर विकास अपना मोटा कमीशन लेता था। उसकी कमाई का यही असली जरिया था।
ऐसी चर्चा है गांव मे कि विकास दुबे की कानपुर, लखनऊ, आगरा समेत प्रदेश के कई शहरों में कीमती जमीनें और मकान हैं, जिनकी कीमत करोड़ों में है। पत्नी और एक बेटा लखनऊ के ही एक मकान में रहते हैं।

ज्यादातर संपत्ति नहीं रखी अपने नाम….

अपराध और राजनीति में दखल रखने की वजह से विकास के साथ लुकाछिपी का खेल चल रहा था। जब वह सत्ता पक्ष के नेता के करीब होता तो खुलेआम अपनी हनक दिखाता। जब उसे किसी नेता का साथ नहीं मिलता तो वह छिपकर रहता।
बीते 20 वर्षों से वह इसी तरह की जिंदगी जी रहा है। इन वर्षों में कई मामलों में जेल भी गया और जमानत पर छूटता भी गया। पुलिस से बचने के लिए वह पैसा तो फेंकता ही था, अपने मकान भी बदलता था। यह काम उसके गुर्गे करते थे। ठिकाने बदलने के लिए ही उसने कई शहरों में मकान खरीदे और बेचे। हालांकि ये भी सच है कि उसकी ज्यादातर संपत्तियां उसके खुद के नाम पर नहीं हैं।
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